उमर खालिद और शरजील इमाम ने 2020 दिल्ली दंगा मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
उच्चतम न्यायालय में जमानत की याचिका
नई दिल्ली। 2020 के दिल्ली दंगा मामले में मुख्य आरोपी उमर खालिद, जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं, और छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम ने नियमित जमानत के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका में यह तर्क दिया गया है कि 5 जनवरी को लागू की गई एक साल की रोक की अवधि समाप्त होने को है, और इस बीच संरक्षित गवाहों की गवाही 5 जनवरी 2027 से पहले पूरी होने की कोई संभावना नहीं है।
याचिका में दी गई जानकारी
बुधवार को दायर की गई याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि संरक्षित गवाहों के परीक्षण के पूरा होने पर या एक वर्ष की अवधि समाप्त होने पर, जो भी पहले हो, खालिद और इमाम अपनी जमानत याचिका को पुनः जीवित कर सकते हैं। उस समय अदालत ने अन्य सह-आरोपियों को जमानत देते हुए खालिद और इमाम के मामलों को अलग रखा था।
दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय
इसके बाद, दोनों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित एक साल की रोक का हवाला देते हुए उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश में संशोधन करना संभव नहीं है।
साक्ष्यों की कमी
याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि वे पिछले छह वर्षों से जेल में हैं और अभियोजन पक्ष 900 से अधिक गवाहों में से एक भी गवाह का बयान दर्ज करने में असफल रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस मामले में कुल 47 संरक्षित गवाह हैं।
मामले की स्थिति
उमर खालिद और शरजील इमाम ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि 2020 दिल्ली दंगा साजिश का मामला वर्तमान में आरोपों पर बहस के चरण में है। उन्होंने कहा कि आरोप तय करने पर बहस 13 जुलाई को पूरी हो गई थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने कार्यवाही रोक रखी है।
अन्य कानूनी पहलू
आरोपियों ने यह भी बताया कि 5 जनवरी के आदेश के बाद एक अन्य घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने 18 मई को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत जमानत से जुड़े एक मामले में 5 जनवरी के फैसले पर सवाल उठाए थे।
दिल्ली दंगा मामला
दिल्ली दंगे के मुख्य साजिश वाले मामले में कुल 18 आरोपी शामिल हैं। जहां उमर खालिद और शरजील इमाम जेल में हैं, वहीं अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। यह मामला 24 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है।
