उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

दिल्ली हिंसा के मामले में गिरफ्तार उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस निर्णय के बाद उमर खालिद ने कहा कि अब उनकी जिंदगी जेल में ही बीतेगी। कोर्ट ने जमानत न देने का कारण बताते हुए कहा कि दोनों के खिलाफ गंभीर आरोप हैं, जो साजिश और हिंसा से जुड़े हैं। जानें इस मामले में अन्य आरोपियों की स्थिति और कोर्ट के फैसले के पीछे की वजहें।
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उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका का फैसला

उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

उमर खालिद और शरजील इमाम

दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को उच्चतम न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया है। हालांकि, अन्य आरोपियों जैसे गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत मिल गई है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने उन सभी को राहत दी, जो उसी FIR में शामिल हैं जिसमें खालिद और इमाम भी हैं।

कोर्ट के निर्णय के बाद विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उमर खालिद ने कहा कि अब उनकी जिंदगी जेल में ही बीतेगी। कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब अन्य आरोपियों को जमानत मिल गई, तो खालिद और इमाम को क्यों नहीं।

जमानत न मिलने का कारण

कोर्ट ने जमानत न देने का कारण भी स्पष्ट किया। बेंच ने उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ हिंसा में उनकी भूमिका को लेकर जानकारी दी। इसमें कहा गया कि दोनों के खिलाफ आरोप साजिश, योजना बनाने और समन्वय करने के संकेत देते हैं, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिकाएं केवल सहायक थीं।

जस्टिस कुमार के अनुसार, शरजील इमाम और उमर खालिद को बड़ी साजिश के कथित मास्टरमाइंड के रूप में देखा गया है, और इस संबंध में प्रस्तुत सबूत सीधे और पुष्टि करने वाले हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच यह सुनिश्चित करनी चाहिए कि क्या ये कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरे की कानूनी परिभाषा में आते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि UAPA की धारा 15 में ‘किसी भी अन्य तरीके से’ का उपयोग यह निष्कर्ष निकालने के लिए किया गया है कि आतंकवादी गतिविधि केवल पारंपरिक हिंसा तक सीमित नहीं है। अदालत ने कहा कि खालिद और इमाम के भाषण भी राज्य की सुरक्षा के लिए खतरे की कानूनी परिभाषा में आते हैं।

कोर्ट ने यह भी बताया कि उमर खालिद की भूमिका एक आयोजक और समन्वयक की थी, जिसने विभिन्न स्थानों और लोगों के बीच समय, तरीका और लिंक प्रदान किया।

चक्का जाम का मुद्दा

कोर्ट ने चक्का जाम को उमर खालिद के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कारण बताया। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों पर भरोसा किया कि खालिद ने 13 दिसंबर 2019 को जामिया में चक्का जाम और धरने के बीच का अंतर समझाया था।

अभियोजन पक्ष का मानना है कि मुख्य सड़कों को लगातार जाम करना और अल्पसंख्यक इलाकों से भीड़ को अन्य क्षेत्रों में भेजना, ये सब सोची-समझी हरकतें थीं।

पुलिस के दावे

पुलिस ने आरोप लगाया कि उमर और शरजील ने जामिया और शाहीन बाग में छात्रों को भड़काने का काम किया। उन्होंने विरोध के नाम पर चक्का जाम का मॉडल अपनाया और इसे हिंसक रूप में बदलने की योजना बनाई।