उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली में देरी पर जताई निराशा

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली में हो रही देरी पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों में गुस्सा और निराशा केवल मोदी सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनकी राजनीतिक साख पर भी इसका असर पड़ा है। अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मानदंड तय करने की मांग की और कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी ने स्थानीय लोगों में निराशा पैदा की है।
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को अपनी गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर लोगों में 'गुस्सा और निराशा' केवल मोदी सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन्हें भी इसके कारण 'बहुत बड़ा राजनीतिक नुकसान' उठाना पड़ा है। अब्दुल्ला ने बताया कि राज्य का दर्जा बहाल करने में लगातार हो रही देरी ने जम्मू-कश्मीर की जनता में निराशा पैदा की है, जो केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं है।


राजनीतिक विश्वसनीयता पर असर

अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता को भी बड़ा नुकसान हुआ है, क्योंकि वह लगातार 'उन गलतियों की कीमत चुका रहे हैं, जो उनकी नहीं हैं।' मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल कराने की उम्मीद में केंद्र सरकार के साथ रचनात्मक संबंध बनाने की उनकी प्रारंभिक रणनीति ने स्थानीय लोगों के बीच उनकी राजनीतिक साख को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने 'द वायर' के लिए पत्रकार करण थापर को दिए एक साक्षात्कार में कहा, 'मैंने इसके लिए अपनी बहुत बड़ी राजनीतिक साख दांव पर लगा दी। मुझे अच्छी तरह पता है कि मैंने इसका एक बड़ा हिस्सा खो दिया है।'


केंद्र सरकार से स्पष्ट मानदंड की मांग

अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मानदंड तय करने का आग्रह किया, ताकि उनकी सरकार के पास एक निश्चित लक्ष्य हो। उन्होंने इस तर्क को खारिज किया कि जब तक आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में काम कर रहे सुरक्षा तंत्र पर उनकी निर्वाचित सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।


प्रशासनिक कामकाज में बाधाएं

अब्दुल्ला ने विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश को 'विसंगति' बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर ऊर्जा विकास निगम और शेर-ए-कश्मीर चिकित्सा विज्ञान संस्थान जैसे प्रमुख संस्थान अब भी उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में हैं। उन्होंने कहा, 'विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश से खराब शासन व्यवस्था का कोई और रूप नहीं हो सकता। कृपया केंद्र शासित प्रदेश रखें, लेकिन उन्हें विधानसभा न दें।'


अनुच्छेद 370 पर रुख

अनुच्छेद 370 पर अपने रुख को कमजोर करने के आरोपों का जवाब देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि संवैधानिक शक्तियों के किसी भी विभाजन के लिए राज्य का दर्जा एक पूर्व कानूनी शर्त है। उन्होंने कहा, 'अनुच्छेद 370 मूल रूप से केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच शक्तियों का बंटवारा था। जब आप राज्य ही नहीं हैं तो राज्य सूची कैसे हो सकती है? अनुच्छेद 370 की बहाली से पहले राज्य का दर्जा बहाल होना जरूरी है।'


प्रधानमंत्री मोदी का वादा

केंद्र सरकार के वादे पर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्षेत्र के अपने दौरों के दौरान व्यक्तिगत रूप से राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई थी। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य राजनीतिक आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से 'मोदी का वादा' था।