उमर अब्दुल्ला ने ईरान में हालात पर जताई चिंता, सुरक्षा को लेकर की अपील
ईरान में सरकार का गठन ईरानी जनता का अधिकार
जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ईरान में किस प्रकार की सरकार बनेगी, यह पूरी तरह से ईरानी नागरिकों पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई अंतरराष्ट्रीय कानून बाहरी बमबारी के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की अनुमति नहीं देता। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता और उनके परिवार की हत्या की निंदा की और सवाल उठाया कि किस कानून ने अमेरिका या इजराइल को ऐसा करने का अधिकार दिया।
उमर अब्दुल्ला ने ईरान की जनता के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और हमले की कड़ी आलोचना की। इसके साथ ही, उन्होंने जम्मू और कश्मीर के लोगों से अपील की कि वे स्थिति को और बिगड़ने न दें, क्योंकि कुछ लोग माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय से संपर्क में हैं
उमर अब्दुल्ला ने धार्मिक नेताओं से अनुरोध किया कि वे अपने दुख को व्यक्त करें, लेकिन कानून को अपने हाथ में न लें। उन्होंने कहा कि हम विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं और ईरान में मौजूद हमारे छात्रों और अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ छात्रों को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है, और उन्होंने उनसे दूतावास द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की।
इस बीच, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई।
सुरक्षा हालात पर चर्चा
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि उपराज्यपाल ने जम्मू कश्मीर में मौजूदा सुरक्षा हालात पर विस्तार से चर्चा की। अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के खिलाफ कश्मीर और जम्मू के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के मद्देनजर यह बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत श्रीवास्तव और मेजर जनरल बलबीर सिंह शामिल हुए।
