उपेंद्र कुशवाहा ने भाजपा में विलय से किया इनकार, दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर स्थिति संदिग्ध
उपेंद्र कुशवाहा का विलय से इनकार
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय करने से साफ इनकार कर दिया है। नई सरकार के शपथ ग्रहण के छह महीने बाद, दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने की संभावनाएं अब कम होती जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने अपने सहयोगियों को एकजुट करने के प्रयास में कुशवाहा को विलय का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। कुशवाहा ने एनडीए के भीतर अपनी पार्टी की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने का निर्णय लिया है।
दीपक प्रकाश की स्थिति
सूत्रों के अनुसार, नवंबर 2025 में दीपक प्रकाश को मंत्रिमंडल में शामिल करने के समय भी ऐसा ही प्रस्ताव दिया गया था, जिसे कुशवाहा ने अस्वीकार कर दिया था। इसके बावजूद, भाजपा ने प्रकाश को मंत्रिमंडल में शामिल किया, यह सोचकर कि राजनीतिक परिदृश्य बदलने पर कुशवाहा अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकते हैं। लेकिन कुशवाहा ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी के हित व्यक्तिगत या पारिवारिक हितों से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
भविष्य की संभावनाएं
कुशवाहा ने भाजपा में विलय न करने के अपने निर्णय को दोहराया है। वे एनडीए में बने रहने की उम्मीद रखते हैं, जबकि दीपक प्रकाश केवल संवैधानिक रूप से निर्धारित छह महीने की अवधि तक ही मंत्री बने रहेंगे। उपेंद्र कुशवाहा ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।
आगामी चुनावों की तैयारी
दीपक प्रकाश को अभी तक आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के लिए एनडीए के उम्मीदवार के रूप में घोषित नहीं किया गया है। हाल ही में पत्रकारों से बातचीत के दौरान, उन्होंने 18 जून को होने वाले चुनावों में भाग लेने वाले सभी उम्मीदवारों को शुभकामनाएं दीं।
