उपराष्ट्रपति का प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधन: विकास और नैतिकता पर जोर

उपराष्ट्रपति ने प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए उनके योगदान और नैतिकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुई प्रगति, महिलाओं की भागीदारी, और तकनीकी प्रगति के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों से अपने कौशल को उन्नत करने और नैतिक आचरण बनाए रखने का आह्वान किया। इस संबोधन में उन्होंने 2047 तक विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
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उपराष्ट्रपति का प्रेरणादायक संबोधन

उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण में देशभर में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारियों और उनके सेवानिवृत्त साथियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उन्हें "भारत का स्तंभ" कहा था, जो अब 79 वर्ष पहले की बात है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि विभिन्न बैचों के अधिकारियों ने इस विरासत को बनाए रखा है और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को राष्ट्रीय एकता और एकजुटता का सबसे बड़ा दूत बताया।


प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रगति

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में हुई अभूतपूर्व प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के सिद्धांत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना, गरीबों के लिए 4 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण और सीमावर्ती गांवों को विकसित करना प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं। उन्होंने महिलाओं की भूमिका को भी सराहा, जो लखपति दीदियों और नमो ड्रोन दीदियों जैसी पहलों के माध्यम से विकास में अग्रणी बन रही हैं।


प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका

उपराष्ट्रपति ने प्रशासनिक अधिकारियों की निष्ठा की सराहना की और कहा कि इन उपलब्धियों में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने जोर दिया कि 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' का अनुभव हर नागरिक को होना चाहिए। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता और ईमानदारी पर जोर दिया।


तकनीकी प्रगति और कौशल विकास

उपराष्ट्रपति ने तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य के संदर्भ में सरकारी कर्मचारियों से अपने कौशल को उन्नत करने का आग्रह किया। उन्होंने iGOT कर्मयोगी जैसे प्लेटफार्मों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि तकनीकी प्रगति ने भ्रष्टाचार को कम करने और सेवा वितरण में सुधार करने में मदद की है।


नैतिकता और नेतृत्व

उपराष्ट्रपति ने तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर के शब्दों का उद्धरण देते हुए कहा कि धर्म सर्वोच्च धन है। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सच्चा नेतृत्व नैतिक आचरण में निहित है। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखने का आह्वान किया।


महिलाओं की भागीदारी

उपराष्ट्रपति ने प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि 2016 में महिलाओं की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 31 प्रतिशत होने की उम्मीद है।


सिविल सेवा परीक्षाओं की चुनौतियाँ

उपराष्ट्रपति ने सिविल सेवा परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा का उल्लेख किया, जिसमें हर साल 12 से 15 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं, लेकिन केवल लगभग 1,000 का चयन होता है। उन्होंने अधिकारियों को उनके दायित्वों के प्रति सचेत रहने का आग्रह किया।


सेवा और कर्तव्य का प्रतीक

उपराष्ट्रपति ने हाल ही में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राष्ट्र के प्रति सेवा और समर्पण का प्रतीक हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि उनका कार्य दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचे और नागरिकों को सशक्त बनाए।


उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा, और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।