उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए उच्चतम न्यायालय ने राज्यों को दिया समय

उच्चतम न्यायालय ने उपभोक्ताओं को उत्पादों के वितरकों और विक्रेताओं की जानकारी का अधिकार देने की याचिका पर राज्यों को जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्तों का समय दिया है। याचिका में उपभोक्ताओं के लिए सही जानकारी के महत्व पर जोर दिया गया है, ताकि वे अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से बच सकें। सुनवाई के दौरान कुछ राज्यों ने जवाब दिया है, जबकि अन्य को समय दिया गया है। यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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उच्चतम न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय

नई दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक याचिका पर कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जवाब देने के लिए छह हफ्तों का समय दिया। इस याचिका में उपभोक्ताओं को उत्पादों के वितरकों और विक्रेताओं की जानकारी, उनकी गुणवत्ता, शुद्धता और प्रमाणन के बारे में अधिकार देने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें कहा गया कि ग्राहकों के लिए सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेना और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से बचना आवश्यक है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल जुलाई में इस मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई थी और केंद्र, विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य से जवाब मांगा था।


याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुनवाई के दौरान बताया कि उन्हें अब तक केवल कुछ राज्यों से ही जवाब प्राप्त हुए हैं, जिनमें हरियाणा, पंजाब, बिहार, असम और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। पीठ ने कहा, 'जिन प्रतिवादियों ने अभी तक जवाब नहीं दिया है, उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्तों का समय दिया जाता है।' न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई तीन महीने बाद तय की। इस याचिका में केंद्र और राज्यों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि सभी वितरक, व्यापारी और दुकानदार अपने पंजीकरण की जानकारी, जैसे नाम, पता, फोन नंबर और कर्मचारियों की संख्या, एक 'डिस्प्ले बोर्ड' पर स्पष्ट और बड़े अक्षरों में प्रदर्शित करें, ताकि यह जानकारी लोगों को आसानी से मिल सके।


याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि किसी ग्राहक को किसी उत्पाद या सेवा से संबंधित समस्या होती है, तो शिकायत दर्ज करने और उपभोक्ता निवारण मंच के माध्यम से समाधान प्राप्त करने के लिए वितरक, डीलर और विक्रेता की जानकारी होना आवश्यक है। इसमें मुख्य रूप से यह कहा गया है कि 'जानने का अधिकार' ग्राहकों को जानकारी प्राप्त करने और सुरक्षित रहने में सक्षम बनाता है, जिससे वे खरीद-बिक्री और वित्तीय लेन-देन के दौरान सही निर्णय ले सकें।