उत्तराखंड में महिलाओं के लिए नई नीति: रोजगार और नेतृत्व में बढ़ावा
उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक नई नीति को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य उन्हें रोजगार, व्यापार और नेतृत्व में शामिल करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि महिलाओं की भागीदारी केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नई नीति के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर 'महिला सभाओं' का गठन किया जाएगा, जिससे महिलाएं गांव के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों और सहकारी समितियों में आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है। यह नीति महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
| Jun 29, 2026, 12:21 IST
महिला नीति का उद्देश्य
उत्तराखंड सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक नई महिला नीति को मंजूरी दी है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर नहीं रहने देना, बल्कि उन्हें रोजगार, व्यापार, नेतृत्व और गांवों के विकास में शामिल करना है। यह नीति उस समय लागू की गई है जब देशभर में महिलाओं के नेतृत्व में विकास के मॉडल पर चर्चा हो रही है।
महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई योजनाओं पर जोर दिया है। इस नई नीति के माध्यम से सरकार का लक्ष्य है कि महिलाओं की भूमिका केवल घरेलू कार्यों या कृषि तक सीमित न रहे, बल्कि वे नौकरियों, व्यवसायों और गांवों के महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सक्रिय रूप से भाग लें।
सीएम धामी का दृष्टिकोण
सीएम धामी ने कहा, "महिलाएं उत्तराखंड के समाज की आधारशिला हैं। हमारी सरकार का मानना है कि महिलाओं को सशक्त किए बिना समाज का विकास संभव नहीं है। इसलिए हमने महिलाओं के लिए कई विशेष योजनाएं शुरू की हैं, जो भविष्य में महत्वपूर्ण बदलाव लाएंगी।" उन्होंने अपने कार्यकाल में महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण और सहकारी समितियों में आरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
गांवों में महिलाओं की भागीदारी
इस नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाना है। पहले गांवों के विकास और बजट की योजना में महिलाओं की आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती थी, लेकिन अब इसे बदलने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष 'महिला सभाओं' का गठन किया जाएगा। ये सभाएं गांव के विकास से जुड़े निर्णयों में अपनी राय देंगी, जिससे प्रशासनिक योजनाओं में महिलाओं के सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी।
आरक्षण का महत्व
मुख्यमंत्री धामी ने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के लिए आरक्षण का एक मजबूत ढांचा तैयार किया है।
सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण: इस निर्णय से सरकारी सेवाओं में उत्तराखंड की बेटियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और उनके परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।
सहकारी समितियों में 33% आरक्षण: अब कॉपरेटिव सेक्टर में भी महिलाओं के लिए 33% सीटें निर्धारित की गई हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
महिलाओं की नई पहल
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। 'महिला सारथी योजना' के तहत महिलाएं अब ऑटो-रिक्शा और टू-व्हीलर टैक्सी चलाकर अपनी कमाई कर रही हैं।
लखपति दीदी योजना: इस योजना के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत किया जा रहा है, जिससे वे सालाना एक लाख रुपये से अधिक कमाने में सक्षम हो सकें।
ड्रोन दीदी योजना: इस योजना के तहत गांवों की महिलाओं को आधुनिक खेती के लिए ड्रोन उड़ाने और उसकी देखरेख की उच्च तकनीकी ट्रेनिंग दी जा रही है।
मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना और एकल महिला स्वरोजगार योजना भी उन महिलाओं के लिए सहारा बनी हैं जो अपने दम पर छोटे व्यवसाय या कुटीर उद्योग शुरू करना चाहती हैं।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड अब एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत कर रहा है जहां महिलाएं केवल योजनाओं का लाभ लेने वाली नहीं, बल्कि राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली ताकत बन चुकी हैं।
