उत्तराखंड मंत्री के पति के विवादास्पद बयान से बिहार में राजनीतिक हलचल
उत्तराखंड सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू के विवादास्पद बयान ने बिहार में राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने बिहार की लड़कियों को पैसे में खरीदने की बात कही, जिससे महिलाओं के सम्मान पर सवाल उठने लगे। इस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बिहार राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले में नोटिस जारी किया है। यह घटना केवल एक बयान नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके प्रति सोच का भी प्रदर्शन करती है।
| Jan 3, 2026, 13:59 IST
राजनीतिक भूचाल का कारण बना बयान
उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा दिया गया एक विवादास्पद बयान बिहार में राजनीतिक हलचल का कारण बन गया है। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच पर बिहार की लड़कियों को पैसे में खरीदने की घृणित बात कही, जिसमें यह कहा गया कि बिहार की लड़कियां 20 से 25 हजार रुपये में मिल जाती हैं।
सोशल मीडिया पर बयान का प्रभाव
जैसे ही यह बयान सामने आया, यह सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। यह केवल एक व्यक्ति का बयान नहीं रह गया, बल्कि बिहार की महिलाओं और समाज के सम्मान का मुद्दा बन गया। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे महिलाओं की गरिमा पर सीधा हमला बताया। राष्ट्रीय जनता दल ने इसे बिहार की बेटियों का अपमान करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। पार्टी के नेताओं ने कहा कि यह केवल एक असभ्य टिप्पणी नहीं, बल्कि महिलाओं को वस्तु समझने वाली मानसिकता का प्रदर्शन है। कांग्रेस ने भी इस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि बिहार की महिलाएं बिकाऊ नहीं हैं और ऐसे विचार रखने वालों को सार्वजनिक जीवन में रहने का कोई अधिकार नहीं है।
महिला आयोग की कार्रवाई
बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गिरधारी लाल साहू को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब मांगा। आयोग ने उनके बयान को न केवल अपमानजनक, बल्कि सामाजिक सौहार्द को तोड़ने वाला भी बताया। इस बीच, भाजपा ने खुद को इस विवाद से बचाने की कोशिश की। पार्टी के नेताओं ने कहा कि यह उनकी संस्कृति का हिस्सा नहीं है और महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। विवाद बढ़ने पर, गिरधारी लाल साहू ने सफाई दी और कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया, साथ ही उन्होंने माफी भी मांगी, लेकिन तब तक मामला हाथ से निकल चुका था।
समाज में महिलाओं की स्थिति
यह घटना केवल एक असंयमित बयान नहीं है, बल्कि यह उस सड़ी हुई सोच का प्रदर्शन है जो भारतीय राजनीति और समाज में आज भी मौजूद है। महिलाओं को कीमत में तौलने वाली मानसिकता किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। बिहार की महिलाओं को सस्ती बताने वाला बयान सीधे तौर पर पूरे समाज को नीचा दिखाने का प्रयास है। यह केवल बिहार की बेटियों का अपमान नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का अपमान है। जिस समाज में महिलाओं को देवी कहा जाता है, उसी समाज में उन्हें बाजार की वस्तु की तरह पेश करना एक बड़ी विडंबना है।
राजनीतिक प्रभाव
यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह बयान किसी आम व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक मंत्री के पति का है। यह तथ्य इस मामले को और गंभीर बनाता है। जब सत्ता से जुड़े लोग इस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं, तो यह सवाल उठता है कि सत्ता की नीतियों में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति कितनी सच्ची प्रतिबद्धता है। राजनीतिक दृष्टि से, यह विवाद भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। बिहार जैसे राज्य में, जहां सामाजिक सम्मान और क्षेत्रीय अस्मिता के मुद्दे संवेदनशील हैं, इस तरह का बयान पार्टी की छवि को गहरी चोट पहुंचा सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को पूरी ताकत से भुनाने में जुट गया है और महिला सम्मान को केंद्र में रखकर भाजपा को घेर रहा है। आने वाले समय में इसके राजनीतिक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
