उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी विभागों से स्वीकृत रिक्तियों का ब्योरा एकत्रित कर अदालत में पेश करें। न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए कहा कि कई पद स्वीकृत होने के बावजूद उन्हें नहीं भरा जा रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकार अनुबंध और अस्थायी कर्मचारियों के माध्यम से रिक्तियों को भरने का प्रयास कर रही है, जो संविधान का उल्लंघन है। न्यायालय ने युवा पीढ़ी की नियुक्तियों की प्रतीक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता जताई है।
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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल

भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं पर न्यायालय की चिंता

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी विभागों के सचिवों से स्वीकृत रिक्त पदों की जानकारी एकत्रित कर हलफनामे के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत करें। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने यह आदेश विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों पर भर्ती न होने के मामले की सुनवाई के दौरान दिए।


अदालत ने सरकारी कार्यालयों में भर्ती प्रक्रिया की खामियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई याचिकाओं से यह स्पष्ट हुआ है कि विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में रिक्तियां होने के बावजूद राज्य सरकार ने सामान्य भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।


न्यायालय ने यह भी पूछा कि जब पद स्वीकृत और उपलब्ध हैं, तो सरकार उन्हें भरने में क्यों असफल है? याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अनुबंध, संविदा और अस्थायी व्यवस्थाओं के माध्यम से रिक्तियों को भरने का प्रयास कर रही है, जो पूरी तरह से अनुचित है।


याचिका में इसे 'शोषणकारी, मनमाना और तर्कहीन' बताया गया है, साथ ही यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का उल्लंघन भी है। न्यायालय ने युवा पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए कहा कि बड़ी संख्या में योग्य युवा नियमित नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


अदालत ने यह भी कहा कि रिक्तियां मौजूद हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी नियमित भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं, जो राज्य प्रशासन की निष्क्रियता को दर्शाता है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि स्थायी और स्वीकृत रिक्तियों की बड़ी संख्या होने के बावजूद इन पदों को अनुबंध और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के माध्यम से भरा जा रहा है, जो चिंता का विषय है।


इसने यह भी कहा कि समय के साथ योग्य युवाओं की आयु सीमा पार हो जाती है। अपने आदेश में न्यायालय ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे सभी विभागों से स्वीकृत रिक्तियों का पूरा ब्योरा एकत्र कर हलफनामा दाखिल करें और यह स्पष्ट करें कि स्थायी और नियमित पदों के उपलब्ध होने के बावजूद नियमित भर्ती प्रक्रिया क्यों शुरू नहीं की जा रही है। न्यायालय ने यह भी पूछा कि श्रेणी-चार के पदों को 'डेड कैडर' क्यों घोषित किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।