उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अवैध खनन पर समिति का गठन किया

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बागेश्वर जिले की कांडा तहसील में खड़िया के अवैध खनन के कारण मकानों में आई दरारों के मामले में एक समिति का गठन किया है। इस समिति में विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक और पर्यावरणविद शामिल हैं। अदालत ने खनन अधिकारियों को निरीक्षण करने का आदेश दिया है और ग्रामीणों ने खनन गतिविधियों के कारण हो रहे नुकसान के बारे में चिंता जताई है। जानें इस मामले में और क्या हो रहा है।
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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अवैध खनन पर समिति का गठन किया

उच्च न्यायालय का निर्णय

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बागेश्वर जिले की कांडा तहसील और अन्य गांवों में खड़िया (सोपस्टोन) के अवैध खनन के कारण मकानों में आई दरारों से संबंधित कई स्वतः संज्ञान जनहित याचिकाओं के साथ-साथ 165 खनन इकाइयों से जुड़ी अन्य याचिकाओं की सुनवाई के बाद एक समिति का गठन किया है।


समिति में शामिल विशेषज्ञ

इस समिति में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी संस्थान, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ-साथ प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत को भी शामिल किया गया है।


खान निरीक्षण का आदेश

उच्च न्यायालय ने खनन अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे हर खान का निरीक्षण करें और समिति को दो सप्ताह के भीतर अदालत में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।


ग्रामीणों की चिंताएं

कांडा तहसील के निवासियों ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर खड़िया के अवैध खनन से हो रहे नुकसान के बारे में जानकारी दी थी। पत्र में उल्लेख किया गया था कि खनन गतिविधियों के कारण गांवों में कृषि, मकान, जल आपूर्ति और अन्य मूलभूत सुविधाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।


आर्थिक पलायन की समस्या

पत्र के अनुसार, आर्थिक रूप से संपन्न लोग हल्द्वानी और अन्य शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं, जिससे गांवों में केवल गरीब और असहाय लोग ही रह गए हैं।


खनन माफिया का खतरा

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि खनन माफिया उनकी आजीविका के साधनों पर कब्जा करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को कई ज्ञापन दिए गए हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।