उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की रोक: आयोग का पक्ष

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने RO-ARO परीक्षा-2023 में चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग पर हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए अंतरिम रोक के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा केवल एक 'सूटेबिलिटी एग्जाम' है और आरक्षण का अंतिम निर्धारण फाइनल चयन चरण में किया जाता है। आयोग ने ओबीसी अभ्यर्थियों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत बताई है। हाईकोर्ट में कुछ अभ्यर्थियों ने चयन सूची को चुनौती दी है, जिसके चलते आयोग ने अपनी प्रक्रिया की पारदर्शिता का बचाव करने का निर्णय लिया है।
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हाईकोर्ट द्वारा रोक के बाद आयोग की स्थिति

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) परीक्षा-2023 में चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग पर हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए अंतरिम रोक के बाद हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन से संबंधित मामलों का गहन अध्ययन शुरू किया है। आयोग का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा केवल एक 'सूटेबिलिटी एग्जाम' होती है, जिसके अंक अंतिम मेरिट में शामिल नहीं होते हैं। आरक्षण का अंतिम निर्धारण फाइनल चयन चरण में किया जाता है।


ओबीसी अभ्यर्थियों का चयन

आयोग के सचिव गिरिजेश त्यागी ने बताया कि 5 अप्रैल 2026 को घोषित अंतिम परिणाम में कुल 419 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिनमें से 176 ओबीसी वर्ग से हैं। इस प्रकार ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जबकि सामान्य वर्ग का प्रतिशत 28.16 रहा। आयोग का दावा है कि यह परिणाम समावेशी चयन प्रक्रिया को दर्शाता है, जिसमें मेरिट और आरक्षण का संतुलन सुनिश्चित किया गया है।


भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता

गिरिजेश त्यागी ने कहा कि RO-ARO भर्ती प्रक्रिया में आयोग ने विज्ञापन की शर्तों और 1994 तथा 1986 की नियमावलियों का पालन किया है। प्रारंभिक परीक्षा केवल स्क्रीनिंग और उपयुक्तता के लिए होती है, जबकि अंतिम चयन मुख्य परीक्षा, टंकण परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर किया जाता है। ओबीसी वर्ग को 42 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलने से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और सामाजिक न्याय का प्रमाण मिलता है।


हाईकोर्ट में उठे सवाल

कुछ अभ्यर्थियों ने अंतिम चयन सूची को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाओं में आरक्षण और माइग्रेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं, जिसके चलते हाईकोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयोग का कहना है कि अदालत में पूरी प्रक्रिया का कानूनी और तथ्यात्मक पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।


हरियाणा मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश

आयोग अब हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेशों और कानूनी टिप्पणियों को अपने पक्ष के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देख रहा है। आयोग का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही प्रारंभिक परीक्षा स्तर पर आरक्षण लागू करने के प्रश्न पर विस्तृत कानूनी परीक्षण की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।


आयोग का पक्ष

आयोग हाईकोर्ट में यह तर्क प्रस्तुत करेगा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से नियमबद्ध, पारदर्शी और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है, ताकि चयनित अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी या नुकसान न हो।