उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शन
स्मार्ट मीटर के खिलाफ उपभोक्ताओं का गुस्सा
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर बिजली उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। फतेहपुर में, स्थानीय बिजली स्टेशन पर स्मार्ट मीटर फेंके गए, जबकि आगरा में महिलाओं ने इन्हें सड़क पर डाल दिया। अलीगढ़, फिरोजाबाद और हाथरस में लोग स्मार्ट मीटर लेकर बिजली उपकेंद्रों की ओर विरोध मार्च करते हुए पहुंचे।
सरकार का दृष्टिकोण और उपभोक्ताओं की चिंताएं
सरकार स्मार्ट प्रीपेड मीटर को एक सुधार के रूप में पेश कर रही है, जिसका उद्देश्य बिलिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाना और बिजली के नुकसान को कम करना है। हालांकि, कई उपभोक्ता इसे अनावश्यक बदलाव मानते हैं। उनका कहना है कि इससे बिल अधिक आ रहे हैं और सुरक्षा के बिना बिजली काटने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
विरोध की बढ़ती लहर
मार्च में ऑटोमैटिक बिजली कटने की शुरुआत के बाद से विरोध और तेज हो गया है। बिजली कानून के नियामक दिशानिर्देशों और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के हालिया बयानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। यह तकनीकी बदलाव अब राज्य में एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा, "मैंने अपने 25 साल के अनुभव में इतना बड़ा विरोध कभी नहीं देखा।"
अखिलेश यादव का बयान
ये विरोध प्रदर्शन अब एक राजनीतिक मुद्दा बन गए हैं, जिसमें विपक्ष योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे भ्रष्टाचार से जोड़ा है। उन्होंने कहा, "स्मार्ट मीटर लगाने के बहाने जनता को लूटा जा रहा है।"
ऊर्जा मंत्री का जवाब
आलोचना के बीच, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने विपक्ष पर पलटवार किया और कहा कि वे स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ है।
उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मशीनें पक्षपाती नहीं होतीं और पारदर्शी बिलिंग के लिए स्मार्ट मीटर आवश्यक हैं।
विरोध जारी
बढ़ते विवाद के बीच, बिजली निगम के अधिकारियों ने उपभोक्ताओं की शिकायतें सुनीं और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शंकाओं को दूर करने का प्रयास किया। सरकार ने नए स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी है, लेकिन प्रदर्शन अभी भी जारी हैं।
