उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़, 300 युवाओं को बंधक मुक्त किया गया

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें लगभग 300 बेरोजगार युवाओं को बंधक बनाया गया था। इस कार्रवाई में 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो एक फर्जी ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से धोखाधड़ी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि ये आरोपी युवाओं को नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये की रजिस्ट्रेशन फ़ीस वसूलते थे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
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साइबर वज्र अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट और वाराणसी पुलिस ने 'साइबर वज्र' नामक अभियान के तहत एक बड़े धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने एक नकली ट्रेनिंग सेंटर पर छापा मारकर लगभग 300 बेरोजगार युवाओं को मुक्त कराया, जो नौकरी की तलाश में वहां पहुंचे थे, लेकिन उन्हें बंधक बनाकर धोखाधड़ी के जाल में फंसाया जा रहा था। इस ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें रैकेट का मास्टरमाइंड भी शामिल है।


पुलिस के अनुसार, ये आरोपी एक अवैध मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड स्कीम का संचालन कर रहे थे। वे बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये की रजिस्ट्रेशन फ़ीस वसूलते थे।


महादेव एंटरप्राइजेज का फर्जी नेटवर्क

डीसीपी (क्राइम) नीतू कादयान ने जानकारी दी कि यह गिरोह 'महादेव एंटरप्राइजेज' नामक एक फर्जी कंपनी के माध्यम से काम कर रहा था और खुद को 'रॉयल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड' की फ्रैंचाइज़ी बताता था। आरोपी बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते थे और उन्हें वाराणसी में नौकरी का लालच देते थे, जिसमें 25,000 रुपये प्रति माह वेतन का वादा किया जाता था।


धोखाधड़ी का तरीका

युवाओं को वाराणसी बुलाकर एक पेशेवर कॉर्पोरेट ऑफिस में इंटरव्यू के लिए ले जाया जाता था। वहां उनसे जॉइनिंग या रजिस्ट्रेशन फ़ीस के रूप में 30,000 से 35,000 रुपये की मांग की जाती थी। इसके बदले में उन्हें कपड़े, तेल और साबुन जैसी चीज़ों की एक बेसिक किट दी जाती थी, जिनकी वास्तविक कीमत केवल 1,000 से 2,000 रुपये थी।


पुलिस का आरोप है कि जॉइनिंग के बाद, युवाओं को एक ट्रेनिंग सेंटर में भेजा जाता था, जहां उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया जाता था और नेटवर्क में कम से कम तीन दोस्तों या रिश्तेदारों को शामिल करने का दबाव डाला जाता था। जो लोग ऐसा नहीं कर पाते थे, उन्हें वेतन न देने और पैसे वापस न करने की धमकी दी जाती थी।


साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले

अधिकारियों ने बताया कि इस रैकेट के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतें भी दर्ज की गई हैं। अब तक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर पांच शिकायतें दर्ज की गई हैं, जबकि ठगी का शिकार हुए लोगों से चार और लिखित शिकायतें मिली हैं, जिससे कुल शिकायतों की संख्या नौ हो गई है।


पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

पुलिस ने गैंग के बैंक खातों की प्रारंभिक जांच में पाया कि पिछले एक साल में लगभग 4 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। इस ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने 20 मोबाइल फोन, एक iPhone 17 Pro, सिम कार्ड, IMEI रिकॉर्ड, एक ASUS लैपटॉप, दो गाड़ियां, 4,020 रुपये नकद और महादेव एंटरप्राइजेज से जुड़े कई कॉर्पोरेट दस्तावेज़ बरामद किए।


गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मास्टरमाइंड दीपक कुमार शाह (31) शामिल है, जो जमुई, बिहार का निवासी है। उसके साथ बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 18 अन्य लोग भी गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में आगे की जांच जारी रखी है।