उत्तर प्रदेश में बंधुआ मजदूरी का मामला: मजदूर की हत्या का सनसनीखेज खुलासा
मुजफ्फरनगर में बंधुआ मजदूरी का मामला
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से एक अत्यंत चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण इकाई में छापेमारी के दौरान बंधुआ मजदूरी के साथ-साथ एक मजदूर की यातना देकर हत्या का खुलासा हुआ है। जांच में यह सामने आया कि एक मजदूर को बंधक बनाकर रखा गया था और उसे बेरहमी से प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई। उसके शव को एक बैग में भरकर ठिकाने लगाया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार ने बताया कि यह जानकारी इस सप्ताह तितावी थाना क्षेत्र में हुई छापेमारी के बाद मिली।
मृतक की पहचान अर्जुन के रूप में हुई है। आरोप है कि नवंबर 2025 में फैक्ट्री में उसे अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिसके चलते उसकी मौत हुई। बाद में उसके शव को एक बैग में भरकर फेंक दिया गया।
पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक अंकित बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है। शिवा त्यागी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अंकित बालियान अभी भी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दो पुलिस टीमों का गठन किया गया है।
कुमार ने बताया कि मामले की गहन जांच और साक्ष्य जुटाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) भी बनाया गया है।
मुक्त कराए गए सभी 12 मजदूरों का मेडिकल परीक्षण किया जा चुका है और उनका उपचार जारी है।
मजदूरों का पुनर्वास और प्रशासन की कार्रवाई
पीड़ितों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर उनके बयान दर्ज किए गए हैं। जिला प्रशासन और श्रम विभाग मिलकर पीड़ित श्रमिकों के पुनर्वास की प्रक्रिया में जुटे हैं। उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत सहायता उपलब्ध कराने, बैंक खाते खुलवाने और उनके परिजनों से मिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, अब तक चार मजदूरों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा चुका है, जबकि अन्य श्रमिकों के परिजनों की तलाश जारी है।
गौरतलब है कि 22 जून को प्रशासन और पुलिस ने मांडी गांव स्थित एक पेपर प्लेट फैक्ट्री पर छापा मारकर नाबालिगों समेत 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि मजदूरों को विभिन्न राज्यों से 12 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर लाया गया था।
हालांकि, उन्हें न तो मजदूरी दी गई और न ही फैक्ट्री परिसर से बाहर जाने की अनुमति थी। आरोप है कि उन्हें एक वर्ष से अधिक समय तक फैक्ट्री में कैद रखकर अमानवीय परिस्थितियों में काम कराया गया।
बचाए गए कई मजदूरों के शरीर पर चोट और यातना के निशान पाए गए। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि फैक्ट्री छोड़ने की कोशिश करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी।
अमानवीय यातनाओं का खुलासा
पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्हें बेरहमी से पीटा गया, भाले से हमला किया गया, कोड़े मारे गए, कुत्तों से कटवाया गया और यहां तक कि जानवरों का चारा खाने के लिए मजबूर किया गया।
इससे पहले पुलिस ने फैक्ट्री मालिक अंकित बालियान, प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम तथा बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। प्रदीप बालियान और शिवा त्यागी को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अंकित बालियान अब भी फरार है।
