उत्तर प्रदेश में पीसीएस अधिकारियों के ट्रांसफर में बड़ा बदलाव

उत्तर प्रदेश में सरकार ने पीसीएस अधिकारियों के ट्रांसफर में बड़ा बदलाव किया है। नई ट्रांसफर नीति के तहत, अधिकारियों का स्थानांतरण उन अधिकारियों के लिए किया जाएगा जिन्होंने एक ही स्थान पर तीन साल पूरे कर लिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस नीति को मंजूरी दी गई। जानें इस नई नीति की विशेषताएँ और इसके तहत होने वाले ट्रांसफर के नियम।
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उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक बदलाव

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में कई जिलों के पीसीएस अधिकारियों के ट्रांसफर में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले से ही संकेत दिए गए थे कि अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाएगा, विशेषकर उन अधिकारियों का जो एक ही स्थान पर तीन साल से अधिक समय बिता चुके हैं। इसके बाद ट्रांसफर की सूची जारी की गई है, और भविष्य में अन्य अधिकारियों के ट्रांसफर की संभावना भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में नई ट्रांसफर नीति को मंजूरी दी गई थी, जिसके अनुसार यूपी में ट्रांसफर केवल 31 मई तक किए जाएंगे।


ट्रांसफर नीति की विशेषताएँ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ट्रांसफर से संबंधित निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह ट्रांसफर नीति केवल वर्ष 2026-27 के लिए लागू होगी और 31 मई 2026 तक ही ट्रांसफर किए जाएंगे। नई नीति के अनुसार, समूह 'क' और समूह 'ख' के अधिकारी, जो अपने कार्यकाल में संबंधित जिलों में तीन वर्ष पूरे कर चुके हैं, उन्हें स्थानांतरित किया जाएगा।


84 एसडीएम के ट्रांसफर की जानकारी

नई ट्रांसफर नीति के तहत, समूह 'क' और 'ख' के अधिकारी, जो एक मंडल में सात वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, उन्हें राज्य के अन्य मंडलों में स्थानांतरित किया जाएगा। विभागाध्यक्ष कार्यालयों और मंडलीय कार्यालयों में बिताई गई अवधि को इस ट्रांसफर के लिए तीन और सात वर्ष की अवधि में नहीं गिना जाएगा। मंडलीय कार्यालयों में अधिकतम तैनाती अवधि तीन वर्ष होगी।


दिव्यांग बच्चों का ध्यान

इस नीति में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि मंदित बच्चों और चलने-फिरने में पूर्णतः प्रभावित दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती ऐसे स्थान पर की जाएगी, जहां उनकी चिकित्सा देखभाल की उचित व्यवस्था हो। इसके अलावा, ट्रांसफर सत्र के बाद, समूह 'क' और 'ख' के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री की मंजूरी आवश्यक होगी।