उच्चतम न्यायालय में पैलेट गन के उपयोग पर रोक लगाने की याचिका दायर

एक पूर्व आईपीएस अधिकारी और दो घायलों ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें नागरिक प्रदर्शनों के दौरान पैलेट गन के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई के दौरान अपने अनुभव साझा किए हैं, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण सभा के अधिकार की रक्षा की भी मांग की गई है। जानें इस मामले में और क्या कहा गया है।
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पैलेट गन के खिलाफ याचिका

नई दिल्ली, 28 जुलाई: एक पूर्व भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी और दो घायल व्यक्तियों ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें नागरिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई है। यह याचिका पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी ने अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर के माध्यम से प्रस्तुत की है। याचिका में केंद्र और संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को निर्देश दें कि वे नागरिक सभाओं को तितर-बितर करने के लिए 'पंप एक्शन राइफल' या 'प्रोजेक्टाइल एक्शन गन' का उपयोग न करें।


घायलों के अनुभव

प्रशांत कुमार (25) ने याचिका में उल्लेख किया है कि वह 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के विरोध में आयोजित 'संसद चलो' मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के रूप में शामिल हुए थे। उनका कहना है कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों की गोलीबारी में उन्हें पैलेट के छर्रे लगे, जबकि उन्होंने कोई उकसावे वाली या आक्रामक गतिविधि नहीं की। इसी तरह, शेख इरशाद मंसूरी (26) ने बताया कि वह पासपोर्ट और वीजा से जुड़े काम के बाद दिल्ली के कनॉट प्लेस में थे और उन्हें भी पैलेट गन के छर्रे लगे।


पुलिस की कार्रवाई का विवरण

याचिका में कहा गया है कि 20 जुलाई 2026 को उच्च शिक्षा की विश्वसनीयता को प्रभावित करने वाले पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की रैपिड एक्शन फोर्स की मदद ली थी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि शाम के समय पुलिस और आरएएफ कर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों को कनॉट प्लेस के इनर सर्कल की ओर धकेल दिया।


संविधानिक अधिकारों का उल्लंघन

याचिका में यह भी कहा गया है कि जब प्रदर्शनकारी पीछे हट रहे थे और कई लोग आत्मसमर्पण की स्थिति में थे, तब भी आरएएफ कर्मियों ने अचानक 'पंप एक्शन गन' का इस्तेमाल किया, जिससे प्रशांत कुमार और मंसूरी को गंभीर चोटें आईं। याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण सभा करने के अधिकार की रक्षा की मांग की है।


मुआवजे की मांग

याचिका में 20 जुलाई को नई दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई के दौरान पैलेट गन से घायल हुए सभी व्यक्तियों को उचित मुआवजा देने, उनके इलाज की व्यवस्था करने और पुनर्वास सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।