उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई और ईओडब्ल्यू को फटकारा, संदिग्ध लेनदेन की जांच में लापरवाही पर सवाल उठाए
उच्चतम न्यायालय की सख्त टिप्पणी
नई दिल्ली, 28 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (आईएचएफएल) से जुड़े संदिग्ध लेनदेन के मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को फटकार लगाई। न्यायालय ने दोनों एजेंसियों के रवैये को 'हैरान करने वाला' करार दिया और कहा कि यह मामला प्रथम दृष्टया 'एक-दूसरे को परस्पर लाभ पहुंचाने' का प्रतीक है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सीबीआई की आलोचना करते हुए कहा कि उसने पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद नियमित मामला दर्ज करने पर कोई निर्णय नहीं लिया और न ही जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
सीबीआई और ईओडब्ल्यू की लापरवाही
पीठ ने कहा, 'सीबीआई और ईओडब्ल्यू की लापरवाही के कारण, उन्होंने न तो स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की और न ही जांच के लिए नियमित मामला दर्ज करने के संबंध में अदालत को सूचित किया।' हालांकि, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू के अनुरोध पर अदालत ने सीबीआई निदेशक और दिल्ली पुलिस आयुक्त की उपस्थिति का निर्देश नहीं दिया। राजू ने आश्वासन दिया कि आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और दो सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
जांच की स्थिति पर सवाल
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 'यह मामला हमारे लिए बेहद चौंकाने वाला है। जांच एजेंसियां मामले की स्थिति को लेकर चुप हैं। निश्चित रूप से यह एक-दूसरे को परस्पर लाभ पहुंचाने का मामला है।' याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन 'सिटिजन्स व्हिसल ब्लोअर्स फोरम' के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बताया कि सीबीआई की जनवरी में प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा धन की हेराफेरी के मामलों का उल्लेख किया गया था।
गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की भूमिका
भूषण ने कहा कि ईओडब्ल्यू ने कुछ प्राथमिकी दर्ज की हैं और सीबीआई ईडी द्वारा चिह्नित पांच मामलों को येस बैंक जांच से जोड़ने पर विचार कर रही है। पीठ ने कहा कि जनवरी के बाद से जांच एजेंसियों ने कोई हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया है। एएसजी ने कहा कि जांच जारी है और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने एक मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है।
अनियमितताओं के आरोप
गैर सरकारी संगठन ने आईएचएफएल के संचालन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कंपनी और उसके तत्कालीन प्रवर्तकों ने बड़े कॉरपोरेट समूहों से जुड़े संस्थाओं को संदिग्ध ऋण दिए, जिसके बाद कथित तौर पर उक्त धन प्रवर्तकों से जुड़ी कंपनियों के खातों में वापस भेजा गया। एनजीओ ने बंबई उच्च न्यायालय के 2 फरवरी, 2024 के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने मामले की जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया था।
