उच्चतम न्यायालय ने 'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की याचिका खारिज की

उच्चतम न्यायालय ने ओडिशा सरकार की याचिका को खारिज करते हुए 'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति दी है। न्यायालय ने कहा कि एनिमेशन बच्चों के लिए एक नई कला है और इसे रोकने का कोई कारण नहीं है। ओडिशा सरकार ने कानून-व्यवस्था की चिंताओं का हवाला दिया था, लेकिन न्यायालय ने पहले ही फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति दे दी थी। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में अधिक जानकारी।
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उच्चतम न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय

नई दिल्ली, 29 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को ओडिशा सरकार द्वारा दायर उस याचिका को अस्वीकार कर दिया, जिसमें 'महाप्रभु जगन्नाथ' फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एनिमेशन एक नई कला है जो बच्चों के लिए बनाई गई है, और ऐसी याचिकाओं के माध्यम से इसे नहीं रोका जा सकता। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के बाद अपने पूर्व आदेश में संशोधन करने से इनकार कर दिया।


पीठ ने कहा, 'देश में रचनात्मकता का विकास हो रहा है। एनिमेशन बच्चों के लिए है। आजकल लोग किताबें पढ़ने में रुचि नहीं रखते हैं।'


उन्होंने यह भी कहा कि कला के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। ओडिशा सरकार ने तर्क दिया था कि भगवान जगन्नाथ के चित्रण को लेकर कुछ वर्गों की आपत्तियों के कारण फिल्म के प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इससे पहले, न्यायालय ने भगवान जगन्नाथ यात्रा के उत्सव के बाद 28 जुलाई या उसके बाद एनिमेटेड फिल्म के अखिल भारतीय प्रदर्शन की अनुमति दी थी। पीठ ने यह भी बताया कि एनिमेटेड फिल्म पहले ही यूट्यूब पर प्रदर्शित की जा चुकी है, जो एक वेब सीरीज पर आधारित है और सेंसर बोर्ड ने इसे दिखाने की अनुमति दी थी।