उच्चतम न्यायालय ने जलवायु कार्यकर्ता की पत्नी की याचिका पर सुनवाई टाली
सोनम वांगचुक की हिरासत पर सुनवाई
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई को 29 जनवरी तक स्थगित कर दिया। इस याचिका में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत अपने पति की हिरासत को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा, “याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी 2026 की तारीख तय की जाए।” गीतांजलि ने सोमवार को शीर्ष अदालत में कहा कि उनके पति की हिरासत में लेने वाले अधिकारियों ने विवेक का प्रयोग नहीं किया और अप्रासंगिक जानकारी पर भरोसा किया।
गीतांजलि ने यह भी कहा कि लेह में उनके पति द्वारा दिए गए भाषण का उद्देश्य हिंसा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उसे रोकना था। उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक को अपराधी के रूप में पेश करने के लिए तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया है।
उन्होंने अदालत को बताया कि वांगचुक को उनकी हिरासत के “संपूर्ण आधार” के बारे में जानकारी नहीं दी गई और उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं मिला।
गीतांजलि ने अपनी याचिका में कहा है कि वांगचुक की हिरासत अवैध और मनमानी है, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। वांगचुक को लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इस केंद्र-शासित प्रदेश को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था, जब लेह में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 अन्य घायल हुए थे।
सरकार ने वांगचुक पर हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया है। लेह के जिलाधिकारी ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि वांगचुक राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल थे, जिसके कारण उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया।
जिलाधिकारी ने हलफनामे में इन आरोपों का खंडन किया कि वांगचुक को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था या उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के कारणों से अवगत कराया गया है। गीतांजलि ने अपनी याचिका में कहा है कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए वांगचुक के कृत्यों या बयानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
