उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की याचिका खारिज की
उच्चतम न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली, 29 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा दायर उस याचिका को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें पेरिस ओलंपिक-2024 में कयाकिंग और कैनोइंग की पहली महिला निर्णायक, बिलकिस मीर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी रद्द करने की चुनौती दी गई थी। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पिछले साल जुलाई में उच्च न्यायालय द्वारा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के खिलाफ बिलकिस मीर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि, 'ऐसा लगता है कि सत्ता में बैठे लोग प्रतिभाशाली व्यक्तियों को प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।'
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उच्चतम न्यायालय से उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील में हुई देरी को माफ करने और फैसले की प्रमाणित प्रति दाखिल करने से छूट देने का अनुरोध किया था।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने में हुई देरी को तो माफ कर दिया, लेकिन मामले के गुण-दोष के आधार पर याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने 27 जुलाई को अपने आदेश में कहा, 'याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद हम इस याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं। इसलिए विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।'
पिछले वर्ष दिए गए 20 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय धर ने कहा था कि यह देखकर अदालत 'चिंतित' है कि एसीबी ने यह जांच करने का प्रयास किया कि स्नातक परीक्षा में बिलकिस मीर की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही तरीके से हुआ या नहीं।
उच्च न्यायालय ने कहा था, 'एसीबी का यह रवैया स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता (मीर) से प्रतिशोध लेने का संकेत देता है। वर्तमान मामला निहित स्वार्थों द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ चलाया गया एक दुर्भावनापूर्ण अभियान प्रतीत होता है।'
