उच्चतम न्यायालय ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन में घायल व्यक्तियों की याचिका पर सुनवाई की सहमति दी

उच्चतम न्यायालय ने कॉजपा के नेतृत्व में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन में घायल व्यक्तियों की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा दागे गए पेलेट से ये लोग घायल हुए। इसके अलावा, जुनैद मलिक ने भी अपनी याचिका में अवैध हिरासत और धमकी का आरोप लगाया है। यह मामला 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित है, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुई थीं।
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उच्चतम न्यायालय की सुनवाई

नई दिल्ली, 28 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पूर्व आईपीएस अधिकारी और दो अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए सहमति दी है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से दागे गए छर्रों से वे घायल हुए थे। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने इस मामले का उल्लेख किया और कहा कि वह इसे अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ तीन अगस्त को सुनवाई करेगी.


याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी की ओर से दायर याचिका में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए 'पंप एक्शन राइफल' या 'प्रोजेक्टाइल एक्शन गन' (पीएजी) से दागे जाने वाले पेलेट के उपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में उल्लेख किया गया है कि 25 वर्षीय कलाकार प्रशांत कुमार 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के रूप में शामिल हुए थे, और उन्हें बिना किसी उकसावे के आरएएफ की गोलीबारी में पेलेट लगने से चोट आई।


अन्य याचिकाकर्ताओं के दावे

याचिका में यह भी कहा गया है कि 26 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी 20 जुलाई को पासपोर्ट और वीजा संबंधी कार्य से कनॉट प्लेस में थे, और उन्हें भी बिना किसी उकसावे के आरएएफ की गोलीबारी में पेलेट लगे। याचिका में कहा गया है कि उस दिन दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के द्रुत कार्रवाई बल (आरएएफ) की मदद से भीड़ प्रबंधन किया।


जुनैद मलिक की याचिका

उच्चतम न्यायालय ने जुनैद मलिक की याचिका पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई है। मलिक ने आरोप लगाया है कि उन्होंने विरोध-प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को भोजन उपलब्ध कराया था और उन्हें तथा उनके परिवार के सदस्यों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। उनका कहना है कि 24 जुलाई की आधी रात को राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल से लौटते समय उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।


विरोध-प्रदर्शन का विस्तार

दिल्ली में 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व में निकाले गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुई थीं। सुरक्षाबलों ने संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। यह विरोध-प्रदर्शन बाद में कई अन्य राज्यों में भी फैल गया, जहां प्रदर्शनकारी नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।