उच्चतम न्यायालय ने गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

उच्चतम न्यायालय ने गैंगस्टर अबू सलेम की रिहाई की याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। सलेम ने दावा किया है कि उसने भारत में 25 साल की सजा पूरी कर ली है, जबकि उसकी याचिका को पहले खारिज कर दिया गया था। जानें इस मामले में क्या हुआ और न्यायालय ने क्या सवाल उठाए।
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गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय

नई दिल्ली, 27 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को गैंगस्टर अबू सलेम द्वारा दायर रिहाई की याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। सलेम ने अपनी याचिका में यह दावा किया है कि उसने भारत में 25 वर्ष की सजा पूरी कर ली है, जैसा कि पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण की शर्तों में उल्लेखित है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ बंबई उच्च न्यायालय के अप्रैल में दिए गए आदेश को चुनौती देने वाली सलेम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।


सलेम ने अपनी याचिका में कहा कि उसकी रिहाई की याचिका को ‘समय से पहले’ और ‘गलत आधार पर’ खारिज कर दिया गया था। 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए सलेम को 11 नवंबर, 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण की शर्तों के अनुसार, सलेम को मौत की सजा नहीं दी जा सकती और उसे अधिकतम 25 साल की सजा हो सकती है।


सुनवाई के दौरान, शीर्ष अदालत ने सलेम के वकील से पूछा, ‘आपने (सलेम ने) 25 साल कैसे पूरे किए हैं?’ इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल को अच्छे व्यवहार के लिए दो साल और नौ महीने की छूट मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि सलेम ने जेल में 25 साल से अधिक समय बिताया है, जिसमें सुनवाई और सजा के बाद का समय भी शामिल है।


पीठ ने इस पर वकील से पूछा, ‘क्या आप विस्तृत निर्णय चाहते हैं या इसे सीधे खारिज करवाना चाहते हैं?’ वकील ने कहा कि वे विस्तृत निर्णय की अपेक्षा रखते हैं। इसके बाद पीठ ने कहा, ‘निर्णय सुरक्षित किया जाता है।’