उच्चतम न्यायालय ने कुल्लू के अधिकारियों को राहत दी, एसआईटी गठन पर रोक
उच्चतम न्यायालय का निर्णय
नई दिल्ली, 27 जुलाई: हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को राहत प्रदान करते हुए, उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कुल्लू के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ 2025 में रेव पार्टियों की अनुमति देने में उनकी कथित भूमिका के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने और प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के आदेश के उस हिस्से पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा और पुलिस अधीक्षक मदन लाल का राज्य के अन्य जिलों में तबादला किया गया था। 24 जून को, उच्च न्यायालय ने कुल्लू जिले में अधिकारियों और रेव पार्टियों के आयोजकों के बीच कथित सांठगांठ को गंभीरता से लिया था।
उच्च न्यायालय ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश दिया, प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया और मामले की जांच के लिए पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) या उससे उच्च स्तर के किसी अधिकारी की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने की बात कही। सोमवार को, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील माधवी दीवान की दलीलों पर गौर किया और कहा कि आयोजकों के पास शराब का लाइसेंस था, इसलिए उन पर कोई गैर-कानूनी या गलत काम करने का आरोप नहीं लगाया जा सकता। वरिष्ठ वकील ने यह भी कहा कि उनका बिना किसी सुनवाई के स्थानांतरण कर दिया गया है और प्राथमिकी दर्ज होने तथा एसआईटी जांच से उनकी छवि पर असर पड़ेगा।
पीठ ने कहा कि उसने उपायुक्त, एसपी और एसडीएम के तबादले को सही ठहराया है क्योंकि अधिकारी तबादले का विरोध नहीं कर सकते। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी गई है और एसआईटी गठन के आदेश पर भी रोक लगाई गई है।
