उच्चतम न्यायालय ने एसएएसटीआरए विश्वविद्यालय को बेदखली से बचाने का आदेश दिया

उच्चतम न्यायालय ने तंजावुर स्थित एसएएसटीआरए विश्वविद्यालय को सरकारी भूमि से बेदखल करने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करे, जो विश्वविद्यालय के अभ्यावेदन पर विचार करे। इस निर्णय में न्यायालय ने संवेदनशीलता से निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता।
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उच्चतम न्यायालय ने एसएएसटीआरए विश्वविद्यालय को बेदखली से बचाने का आदेश दिया

उच्चतम न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय

उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तंजावुर में स्थित ‘षणमुगा आर्ट्स, साइंस, टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च एकेडमी’ (एसएएसटीआरए) को सरकारी भूमि से बेदखल करने का निर्देश दिया गया था।


प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करे। पीठ ने यह भी कहा कि समिति को विश्वविद्यालय के अभ्यावेदन पर विचार करना चाहिए और चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने से पहले संस्थान को सुनवाई का अवसर प्रदान करना चाहिए।


राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पैरवी की। पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों के मामलों में ‘संवेदनशीलता’ से निपटे, और यह सुनिश्चित करे कि जब तक समिति अभ्यावेदन पर निर्णय नहीं लेती, तब तक संस्थान के कार्यों में कोई रुकावट न आए।


हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। पीठ ने विश्वविद्यालय को अंतरिम राहत देते हुए कहा, ‘यह भूमि दशकों से एक विश्वविद्यालय द्वारा सार्वजनिक कार्यों के लिए उपयोग की जा रही है। राज्यों को ऐसे संस्थानों से निपटते समय संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।’ यह अंतरिम आदेश विश्वविद्यालय द्वारा 9 जनवरी को मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए दायर की गई अपील पर पारित किया गया।