उच्चतम न्यायालय ने उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला के तलाक को मंजूरी दी
उच्चतम न्यायालय का निर्णय
शुक्रवार को, उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला के तलाक को स्वीकृति प्रदान की। न्यायालय ने दोनों पक्षों की उस दलील पर ध्यान दिया जिसमें उन्होंने अपनी व्यक्तिगत खुशियों का उल्लेख किया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता की ओर से दलील पेश की।
अनुच्छेद 142 के तहत अर्जी
सिब्बल ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत तलाक के लिए अर्जी प्रस्तुत की गई है, क्योंकि दोनों ने आपसी सहमति से मामले को सुलझा लिया है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा, "हम इसे अपने आदेश का हिस्सा बनाएंगे और इसके अनुसार निपटारा करेंगे।"
तलाक की प्रक्रिया
पीठ ने पूछा कि यह अर्जी कब दाखिल की गई थी, और बताया गया कि यह 22 जुलाई को प्रस्तुत की गई थी। सिब्बल ने कहा, "बाकी सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे।" पीठ ने उमर अब्दुल्ला की ओर से क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग करने वाली याचिका पर भी सुनवाई की।
दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश
उच्चतम न्यायालय ने जुलाई 2024 में पायल अब्दुल्ला से जवाब मांगा था, जब उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने 12 दिसंबर 2023 को उनकी तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि उनकी अपील में कोई ठोस आधार नहीं था।
अंतरिम गुजारा भत्ता
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अगस्त 2023 में उमर अब्दुल्ला को आदेश दिया था कि वे अपनी पत्नी को हर महीने 1.5 लाख रुपये का अंतरिम गुजारा भत्ता दें। इसके अलावा, उन्हें अपने दोनों बेटों की पढ़ाई के लिए हर महीने 60,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया गया था।
