ईरान युद्ध के बाद वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल, भारत में कीमतें स्थिर
वैश्विक तेल कीमतों में उछाल
ईरान में युद्ध की शुरुआत के बाद से वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका प्रभाव दुनिया के कई देशों में देखा जा रहा है। हालांकि, भारत में अभी तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
डेटा के अनुसार, युद्ध से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत 71.28 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 109 डॉलर तक पहुंच गई है। इसी दौरान, पेट्रोल की वैश्विक औसत कीमत 1.2 डॉलर से बढ़कर 1.4 डॉलर प्रति लीटर और डीजल की कीमत 1.52 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि युद्ध के कारण आपूर्ति में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने कीमतों को प्रभावित किया है।
कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि
जिन देशों में ईंधन की कीमतें बाजार के अनुसार तय होती हैं, वहां सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। उदाहरण के लिए, म्यांमार में पेट्रोल की कीमत में 100% और डीजल में 119.9% की वृद्धि हुई है। फिलीपींस में डीजल 111% और पेट्रोल 71.6% महंगा हुआ है। मलेशिया में पेट्रोल के दाम 52.4% और डीजल के 84.6% बढ़े हैं। यूएई में भी पेट्रोल 40.8% और डीजल 86.1% महंगा हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में युद्ध के बाद से पेट्रोल की कीमत 46.5% और डीजल की 64.1% बढ़ी है।
यूरोप और अमेरिका में भी तेल महंगा हुआ
यूरोप और अमेरिका में भी तेल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अमेरिका में पेट्रोल 31.1% और डीजल 41.8% महंगा हुआ, जबकि जर्मनी और फ्रांस में डीजल की कीमतें 30% से अधिक बढ़ गई हैं।
डीजल की कीमतों में वृद्धि का कारण
विश्लेषण से पता चलता है कि अधिकांश देशों में डीजल की कीमतें पेट्रोल से अधिक बढ़ी हैं। इसका कारण ट्रांसपोर्ट और उद्योगों में डीजल की अधिक मांग, आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें और रिफाइनिंग लागत में वृद्धि है।
भारत में कीमतें स्थिर क्यों हैं?
ग्लोबल उछाल के बावजूद, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि “पेट्रोल और डीजल, जिन पर भारत मुख्य रूप से निर्भर है, उनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर हैं।”
मंत्रालय ने यह भी कहा कि तेल कंपनियों को घाटा हो रहा है, फिर भी आम उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाला गया है। मंत्रालय ने कहा, “ये फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस प्रतिबद्धता के अनुरूप हैं, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी से भारतीय नागरिकों की रक्षा की जा रही है।”
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत में भी कीमतों में वृद्धि संभव है। वर्तमान में सरकार कीमतों को नियंत्रित कर रही है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहेगी या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
