ईरान में विरोध प्रदर्शनों की लहर: खामेनेई के खिलाफ क्रांति की मांग
ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों का हाल
ईरान इस समय बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों का सामना कर रहा है, जो दिसंबर 2025 के अंत से शुरू होकर जनवरी 2026 में पूरे देश में फैल चुके हैं। यह आंदोलन आर्थिक संकट, महंगाई, रियाल की गिरावट और बिजली-पानी की कटौती के कारण शुरू हुआ था, लेकिन अब यह इस्लामी गणराज्य के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ क्रांति की मांग में बदल चुका है।
मुख्य घटनाक्रम और स्थिति:
- प्रदर्शन कहाँ-कहाँ? तेहरान सहित सभी 31 प्रांतों में प्रदर्शन हो रहे हैं। लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, नारे लगाते हुए जैसे 'खामेनेई मुर्दाबाद', 'मौत दीकटेटर को', 'मुल्ला देश छोड़ो', और 'इस साल सैयद अली (खामेनेई) को उखाड़ फेंकेंगे'।
- हिंसा और मौतें: मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें 490 से अधिक प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बल के जवान शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में 2,000 तक मौतों का अनुमान है, खासकर इंटरनेट बंद होने के दौरान। हजारों लोग घायल हैं और 10,000 से अधिक को गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा बलों ने लाइव फायरिंग, पेलेट गन और बल प्रयोग किया है। अस्पतालों में भीड़भाड़ है, और कई जगह शवों के ढेर की खबरें आ रही हैं।
- सरकार की प्रतिक्रिया: खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को 'वंडल्स', 'सबोटर्स' और अमेरिका-इज़राइल के एजेंट बताया है। इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं, और सरकार ने दमन की कार्रवाई तेज कर दी है। सरकारी मीडिया में समर्थन रैलियों का प्रसारण किया जा रहा है, लेकिन असंतोष बढ़ता जा रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय कोण: अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। निर्वासित क्राउन प्रिंस ने भी प्रदर्शनकारियों को एकजुट रहने और शहरों पर कब्जा करने की अपील की है। कुछ स्थानों पर लायन एंड सन फ्लैग (पुरानी राजशाही का प्रतीक) लहराया जा रहा है।
क्या यह पूरी क्रांति है?
यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद का सबसे बड़ा और व्यापक आंदोलन प्रतीत होता है। लोग शासन परिवर्तन, लोकतंत्र या राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इंटरनेट बंदी और कठोर दमन के कारण स्थिति की सटीक जानकारी प्राप्त करना मुश्किल है। स्थिति नाजुक है—शासन कमजोर दिख रहा है, लेकिन IRGC और सुरक्षा बल अभी भी वफादार हैं। यदि दमन जारी रहा, तो और खूनखराबा हो सकता है, या यदि बड़े पैमाने पर विद्रोह हुआ, तो बदलाव संभव है।
