ईरान पर अमेरिका और इज़राइल का बड़ा हमला: तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर एक बड़ा हमला किया है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक तेल बाजार में हलचल मची है। इस हमले के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है, और भारतीय शेयर बाजार पर इसके नकारात्मक प्रभाव की आशंका जताई जा रही है। जानें कि कैसे यह स्थिति निवेशकों को प्रभावित कर सकती है और क्या संभावित परिणाम हो सकते हैं।
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ईरान पर अमेरिका और इज़राइल का बड़ा हमला: तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका और इज़राइल का ईरान पर हमला


अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई की है। शनिवार, 28 फरवरी 2026 को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ने ईरान में "मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस" की शुरुआत की है। इसके साथ ही, इज़राइल ने भी ईरान के विभिन्न स्थानों, जिसमें तेहरान शामिल है, पर मिसाइल हमले किए हैं। यह कार्रवाई ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, मिसाइल क्षमताओं और क्षेत्रीय खतरों को समाप्त करने के उद्देश्य से की गई है। ट्रंप ने इसे "मैसिव एंड ऑंगोइंग" ऑपरेशन बताया और कहा कि अमेरिका "ओवरवेल्मिंग स्ट्रेंथ" का उपयोग कर रहा है।


तेल की कीमतों में वृद्धि

इस हमले के परिणामस्वरूप वैश्विक तेल बाजार में भारी हलचल मची है। ईरान, जो कि दुनिया का एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है, होर्मुज स्ट्रेट के निकट स्थित है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल व्यापार होता है। हमले के बाद, तेल की कीमतों में जोखिम प्रीमियम जुड़ गया है।



  • ब्रेंट क्रूड: लगभग $72-73 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले दिनों से 2-3% की वृद्धि दर्शाता है।

  • WTI क्रूड: $67-68 प्रति बैरल के स्तर पर है।

  • MCX पर भारतीय क्रूड ऑयल फ्यूचर्स भी ₹6000-6100 के स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं, जिसमें 0.5-1% की बढ़ोतरी देखी गई है।


विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक करता है या क्षेत्रीय तेल बुनियादी ढांचे पर हमला करता है, तो क्रूड की कीमतें $90-110 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। प्रारंभिक प्रतिक्रिया में 3-5% की वृद्धि हो चुकी है, और सोमवार को बाजार खुलने पर और उछाल की संभावना है।


स्टॉक मार्केट पर संभावित प्रभाव

भारतीय शेयर बाजार (निफ्टी, सेंसेक्स) और वैश्विक बाजारों पर इस घटना का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके मुख्य कारण हैं:



  1. ऊंची क्रूड कीमतें → महंगाई का दबाव: भारत 80-85% क्रूड का आयात करता है। कीमतों में वृद्धि से पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, जिससे ट्रांसपोर्ट, FMCG, ऑटो और एविएशन सेक्टर पर खर्च बढ़ेगा। इससे उपभोक्ता खर्च में कमी आ सकती है और महंगाई बढ़ेगी। RBI के लिए भी ब्याज दरों पर प्रभाव पड़ सकता है।

  2. रिस्क ऑफ सेलिंग: वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक निकासी कर सकते हैं। पिछले ऐसे घटनाक्रमों में सेंसेक्स/निफ्टी में 1-3% की गिरावट देखी गई है।

  3. सेक्टर-वाइज प्रभाव:



    • नेगेटिव: बैंकिंग, ऑटो, FMCG, रियल एस्टेट, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (महंगाई और कमजोर मांग के कारण)।

    • पॉजिटिव/कम प्रभावित: ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियां जैसे ONGC, Oil India (उच्च क्रूड से लाभ), डिफेंस स्टॉक्स (जियोपॉलिटिकल टेंशन से)।

    • वैश्विक स्तर पर भी अमेरिकी स्टॉक्स में गिरावट देखी जा सकती है, विशेषकर टेक और ग्रोथ सेक्टर में।




संभावित परिदृश्य 2 मार्च को:



  • ओपनिंग में गैप-डाउन (1-2% नीचे) संभव है।

  • यदि ईरान की ओर से कोई बड़ा जवाबी हमला नहीं होता है, तो दिन के दौरान रिकवरी हो सकती है।

  • हालांकि, यदि स्थिति और बिगड़ती है (जैसे होर्मुज स्ट्रेट में कोई डिस्टर्बेंस), तो 3-5% तक की गिरावट आ सकती है।


यह स्थिति तेजी से बदल रही है। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए, हेजिंग (ऑप्शंस/गोल्ड) पर विचार करें और दीर्घकालिक निवेशकों को पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए। अपडेट्स के लिए समाचारों पर नज़र रखें।