ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर फिर से पाबंदियां लगाईं
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर फिर से पाबंदियां लगाने का निर्णय लिया है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के बाद आया है। ईरान की सैन्य कमान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने अपने वादे का उल्लंघन किया है। इस स्थिति के चलते जलडमरूमध्य की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। हालाँकि, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की उम्मीदें भी हैं। जानें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर पाबंदियों का वैश्विक व्यापार पर क्या असर हो सकता है।
| Apr 18, 2026, 15:55 IST
ईरान का नया निर्णय
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को खोलने के अपने पूर्व निर्णय से पीछे हट गया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी पूरी ताकत से जारी रहेगी।
अमेरिका पर आरोप
समझौता तोड़ने के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
ईरान की सैन्य कमान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से जुड़े जहाजों को रोकने का कार्य जारी रखकर अपने वादे का उल्लंघन किया है। एक कड़े बयान में कहा गया है कि जलडमरूमध्य से आवाजाही तब तक कड़ी निगरानी में रहेगी, जब तक अमेरिका ईरान के जहाजों को पूरी तरह से स्वतंत्रता नहीं देता। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब यह जलडमरूमध्य ईरान के सशस्त्र बलों की कड़ी निगरानी में रहेगा। इसका अर्थ है कि जहाजों की आवाजाही सीमित और नियंत्रित होगी, जो परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
संघर्ष-विराम के बाद की स्थिति
एक ही दिन में फिर से खोलने से लेकर पाबंदियों तक
हाल ही में, ईरान ने संघर्ष-विराम के बाद कमर्शियल शिपिंग के लिए जलमार्ग को फिर से खोला था। इससे पहले, ईरान ने कहा था कि संघर्ष-विराम के दौरान जहाज निर्धारित मार्गों से गुजर सकते हैं। तनाव बढ़ने के बावजूद, कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का एक नया दौर जल्द ही इस्लामाबाद में होने की उम्मीद है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन चर्चाओं से स्थिति को सामान्य करने में मदद मिलेगी, हालाँकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार मार्गों में से एक है, विशेषकर तेल की शिपिंग के लिए। यहाँ किसी भी प्रकार की पाबंदी या रुकावट से वैश्विक बाजार और ऊर्जा की कीमतों पर प्रभाव पड़ सकता है।
