ईरान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा: कूटनीतिक वार्ता और अमेरिका की आलोचना

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत में कूटनीतिक वार्ता की, जिसमें उन्होंने अमेरिका और इज़राइल की नीतियों की आलोचना की। ट्रंप की चेतावनी के बावजूद, अराघची ने ईरान की स्थिति को मजबूत बताया और कहा कि उनका देश कभी भी दबाव में नहीं आएगा। इस वार्ता में पश्चिम एशिया के संकट और ऊर्जा आपूर्ति पर भी चर्चा की गई। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में और क्या कहा गया।
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ईरान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा: कूटनीतिक वार्ता और अमेरिका की आलोचना gyanhigyan

ट्रंप की चेतावनी और ईरानी विदेश मंत्री की दिल्ली यात्रा

चीन की यात्रा पर गए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अमेरिका के साथ जल्द से जल्द कूटनीतिक समझौता करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि ईरान ऐसा नहीं करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची दिल्ली पहुंचे हैं, जहां उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ विस्तृत चर्चा की। यह वार्ता पश्चिम एशिया के संकट, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री स्थिरता पर केंद्रित थी। अराघची तीन दिवसीय यात्रा पर भारत आए हैं, जिसमें वे ब्रिक्स सम्मेलन में भी भाग लेंगे। जयशंकर ने फेसबुक पर इस वार्ता की जानकारी साझा की और कहा कि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा की।


ब्रिक्स सम्मेलन में अराघची की भागीदारी

अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान अवैध विस्तारवाद और युद्धोन्माद का शिकार है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा करने का आग्रह किया। यह बयान उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन दिया, जिसमें एस जयशंकर के नेतृत्व में रूस, ब्राजील और अन्य देशों के विदेश मंत्री शामिल हुए। अराघची ने कहा कि ईरान, अन्य स्वतंत्र देशों की तरह, अवैध विस्तारवाद का शिकार है और यह बातें आज की दुनिया में अस्वीकार्य हैं। उन्होंने इस बैठक के महत्व को भी रेखांकित किया, खासकर जब पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ रहा है।


अमेरिका और इज़राइल की आलोचना

अराघची ने अमेरिका और इज़राइल की नीतियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि ईरान एकजुट होकर और भी मजबूत बनकर उभरेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान से संबंधित किसी भी समस्या का सैन्य समाधान संभव नहीं है। ईरानी लोग कभी भी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकते, बल्कि वे सम्मान की भाषा का उपयोग करते हैं।