ईरान के मिसाइल भंडार पर ट्रंप के दावों की सच्चाई पर सवाल
ट्रंप का विवादास्पद दावा
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के हमलों के परिणामस्वरूप ईरान की मिसाइल क्षमताएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, और अब तेहरान के पास उसके पुराने सैन्य शस्त्रागार का केवल एक छोटा हिस्सा बचा है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक गुप्त रिपोर्ट ने ट्रंप के इस दावे को चुनौती दी है, जिससे वाशिंगटन में नई बहस छिड़ गई है।
ट्रंप का साक्षात्कार
राष्ट्रपति ट्रंप ने 'मीट द प्रेस' में एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका ने ईरानी सैन्य ढांचे को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास अब उसके मिसाइल भंडार का केवल 21 या 22 प्रतिशत हिस्सा बचा है। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री संकट के समाधान का भरोसा भी जताया और कहा कि उनके प्रशासन ने कई कमर्शियल तेल टैंकरों को सुरक्षित निकाला है।
खुफिया रिपोर्ट की सच्चाई
हालांकि ट्रंप के दावे के विपरीत, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने अपने 33 मिसाइल ठिकानों में से 30 पर फिर से नियंत्रण प्राप्त कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास अभी भी युद्ध से पहले के मिसाइल भंडार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित है।
लेबनान के राष्ट्रपति का बयान
इस बीच, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ईरान और हिजबुल्लाह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को चेतावनी दी कि उन्हें लेबनान के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। औन ने कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान को एक सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
नए युद्धविराम की संभावना
हाल ही में वाशिंगटन में इजरायली और लेबनानी दूतों के बीच एक नए युद्धविराम समझौते की रूपरेखा तैयार की गई है। हालांकि, इसकी स्थिरता पर संदेह है, क्योंकि पिछले महीने का युद्धविराम भी टूट गया था। लेबनानी राष्ट्रपति ने इजरायल को चुनौती दी कि केवल बमबारी से युद्ध नहीं जीते जा सकते।
