ईरान के बंदरगाह पर अमेरिका-इजरायल का मिसाइल हमला, भारत-रूस व्यापार पर असर

अमेरिका और इजरायल ने ईरान के बंदर अंजाली पर मिसाइल हमला किया है, जो मुंबई से सेंट पीटर्सबर्ग को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का हिस्सा है। इस हमले से भारत और रूस के द्विपक्षीय व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे माल ढुलाई की लागत में वृद्धि होगी और व्यापारिक संबंधों में बाधा आ सकती है। INSTC प्रोजेक्ट के तहत रूस एक नई रेल लाइन का निर्माण कर रहा है, जो ईरान के बंदरगाहों से सीधे जुड़कर व्यापार को आसान बनाएगी।
 | 

नई दिल्ली में मिसाइल हमले की जानकारी

नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के बंदर अंजाली पर मिसाइल हमला किया है। यह स्थान मुंबई से रूस के सेंट पीटर्सबर्ग को जोड़ने वाले 7,200 किमी लंबे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब है। भारत और रूस ने इस कॉरिडोर के माध्यम से 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी बंदरगाह पर हुए इस हमले से भारत और रूस के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को नुकसान हो सकता है.


INSTC का महत्व

इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर स्वेज नहर को बाइपास करता है और इसके माध्यम से एशिया और यूरोप के बीच व्यापार में तेजी आने की उम्मीद है। इजरायल और अमेरिका ने 18 मार्च को कैस्पियन सागर के तट पर स्थित बंदर अंजाली पर मिसाइल हमला किया, जिससे वहां के कस्टम हाउस और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचा है.


रूस और भारत के बीच व्यापार

मॉस्को यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया, अफ्रीका स्टडीज के प्रोफेसर रेनात कारामुरजोव ने बताया कि स्वेज नहर को बाइपास करने वाला यह मार्ग पहले सुरक्षित माना जाता था, लेकिन अब इजरायली और अमेरिकी हमलों के कारण बीमा और माल ढुलाई की लागत में वृद्धि होगी। इससे रूस और अन्य सीआईएस देशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.


INSTC प्रोजेक्ट का विवरण

INSTC के तहत रूस एक नई रेल लाइन का निर्माण कर रहा है, जो उसे सीधे ईरान के बंदरगाहों से जोड़ेगी। इससे मुंबई तक पहुंच आसान हो जाएगी। रूस ने इस प्रोजेक्ट के लिए ईरान को 1.4 अरब डॉलर का लोन देने पर सहमति जताई थी, जिससे सामान को सेंट पीटर्सबर्ग से मुंबई पहुंचने में केवल 10 दिन का समय लगेगा, जबकि वर्तमान में इसमें 30 से 45 दिन लगते हैं.


भविष्य की संभावनाएं

रूस के पॉलिटिकल एनालिस्ट सर्गेई स्ट्रोकन ने कहा कि यह कॉरिडोर भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ट्रांजिट टाइम 25-30 दिन से घटकर केवल 7 दिन रह जाएगा. रूस की अर्थव्यवस्था में यूरोप के साथ व्यापार हमेशा महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद चीन और भारत के साथ व्यापार में वृद्धि हुई है. यह रेल लाइन आने वाले समय में स्वेज नहर से होने वाले व्यापार को चुनौती दे सकती है.


नई रेल लाइन का निर्माण

नई रेल लाइन ईरान के दो शहरों अस्तारा और राश्त को जोड़ेगी, जिससे ईरान उत्तर में अजरबैजान से जुड़ जाएगा और रूसी रेलवे के ग्रिड तक पहुंच प्राप्त करेगा. इस रेल लाइन के 2028 में पूरा होने की उम्मीद है, जिससे यह पूरा स्ट्रैच 6,920 किमी लंबा होगा. फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों के माध्यम से रूसी कारोबारियों की भारत तक पहुंच आसान होगी, साथ ही सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान तक भी पहुंच संभव होगी.