ईरान के प्रतिनिधि ने होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका की भूमिका पर उठाए सवाल

ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह जलमार्ग सभी देशों का है और अमेरिका को वहां से हट जाना चाहिए। बातचीत के लिए ईरान की तत्परता और संघर्ष की शुरुआत पर उनके विचार भी महत्वपूर्ण हैं। जानें, उन्होंने भारत के समर्थन पर क्या कहा और कैसे वे शांति की कामना कर रहे हैं।
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भारत में ईरान के प्रतिनिधि का बयान

डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही, जो ईरान के प्रतिनिधि हैं, ने होर्मुज स्ट्रेट के संदर्भ में कहा कि यह क्षेत्र सभी देशों का है, न कि केवल अमेरिका का। उन्होंने यह भी बताया कि हम चाहते हैं कि यह जलमार्ग खुला रहे, लेकिन वर्तमान में स्थिति ठीक नहीं है और कुछ ही जहाजों को यहाँ से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर उन्होंने कहा कि हमें उन सभी नेताओं से अपील करनी चाहिए जो शांति और न्याय की कामना करते हैं कि वे एकजुट होकर युद्ध को रोकने की कोशिश करें। उन्होंने सवाल उठाया कि फारस की खाड़ी में अमेरिकी जहाजों की उपस्थिति का क्या उद्देश्य है और उन्हें वहां से हट जाना चाहिए।


बातचीत के लिए तैयार, लेकिन शर्तों के साथ

इलाही ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह बातचीत तर्क, गरिमा, मानवता और अधिकारों के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी भी बातचीत की मेज नहीं छोड़ी, जबकि अमेरिकियों ने इसे छोड़ दिया क्योंकि उनकी मांगें अत्यधिक थीं।


संघर्ष की शुरुआत और ईरान का रुख

उन्होंने कहा कि ईरान ने संघर्ष की शुरुआत नहीं की है, बल्कि यह उन पर थोप दिया गया है। ईरान केवल अपनी रक्षा कर रहा है और वह किसी भी स्थिति में झुकने को तैयार नहीं है।


दुनिया में शांति की कामना

डॉ. इलाही ने ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि अमेरिका कुछ नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पहले खुला था और ईरान इसे बंद नहीं करना चाहता। उन्होंने आशा व्यक्त की कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी।


भारत के समर्थन के लिए आभार

भारत के रुख पर उन्होंने कहा कि वे भारतीय सरकार के आभारी हैं, जिसने ईरान का समर्थन किया है। उन्होंने इस सभा में भाग लेने वाले सभी अधिकारियों का भी धन्यवाद किया।