ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर: होर्मुज स्ट्रेट का खुलना और वैश्विक बाजार पर प्रभाव

ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुल गया है, जिससे जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और संभावित समझौते की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। जानें इस स्थिति का क्या प्रभाव हो सकता है और क्या युद्ध की स्थिति फिर से उत्पन्न हो सकती है।
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ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान

ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के चलते होर्मुज स्ट्रेट अब पूरी तरह से खुल गया है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। हाल ही में ईरान ने इस स्ट्रेट को खोलने की घोषणा की, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान की लेबनान से जुड़ी शर्तों को स्वीकार किया। ईरान ने कहा था कि वह होर्मुज तभी खोलेगा जब लेबनान में भी सीजफायर लागू होगा। इजराइल द्वारा हमले रोकने के कुछ घंटों बाद ही ईरान ने यह कदम उठाया।


सीजफायर के बाद होर्मुज का खुलना

40 दिनों के संघर्ष और 9 दिनों के सीजफायर के बाद, कुल 49 दिनों के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से राहत की खबर आई है। अमेरिका को युद्ध में हार माननी पड़ी और लेबनान को लेकर ईरान की शर्तें माननी पड़ीं। जब ट्रंप और नेतन्याहू ने ईरान की शर्तों को मानते हुए लेबनान में हमले रोके, तो ईरान ने तुरंत होर्मुज स्ट्रेट खोलने का निर्णय लिया।


सीजफायर की अवधि तक खुला रहेगा होर्मुज

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पुष्टि की है कि होर्मुज स्ट्रेट अब जहाजों के लिए खुला है। यह कदम लेबनान में सीजफायर के बाद उठाया गया है। हालांकि, यह खुलना केवल सीजफायर की अवधि तक ही रहेगा। जब तक अमेरिकी जेट्स खामोश हैं, कमर्शियल जहाजों के लिए यह मार्ग खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका ने अपनी नाकाबंदी जारी रखने की बात कही है।


कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

इस स्थिति का असर यह हुआ है कि ट्रंप ने ईरान को धन्यवाद दिया है। कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है। ईरान के इस कदम से समझौते की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामाबाद में वार्ता की योजना बनाई जा रही है, जहां सुरक्षा के लिए 20,000 सैनिकों की तैनाती की जा रही है।


ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौता

होर्मुज स्ट्रेट के खुलने के बाद, यह माना जा रहा है कि ईरान और अमेरिका किसी समझौते पर पहुंच सकते हैं। लेकिन यदि समझौता नहीं होता है और दोनों पक्ष एक-दूसरे की शर्तों को मानने से इनकार करते हैं, तो क्या फिर से युद्ध की स्थिति उत्पन्न होगी? अमेरिका और ईरान की सैन्य तैयारियों को देखते हुए, ऐसा लगता है कि यदि डील नहीं होती है, तो एक और संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।