ईरान और अमेरिका के बीच तनाव: रूस की नई तकनीक से बढ़ी चुनौतियाँ
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
बीती रात समुद्र में अमेरिका और ईरान के बीच हुई टकराव ने वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को फिर से जगा दिया है। इस संघर्ष में रूस की भूमिका को अब सबसे महत्वपूर्ण और खतरनाक माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के लिए एक ऐसा रणनीतिक चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसे तोड़ना अमेरिका जैसी महाशक्ति के लिए भी चुनौतीपूर्ण होगा।
द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस की खुफिया एजेंसी जीआरयू ने ईरान के लिए एक गुप्त मास्टर प्लान बनाया है। इस योजना के तहत तेहरान को 5000 फाइबर ऑप्टिक ड्रोन दिए जा रहे हैं, जिन्हें किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम द्वारा ट्रैक नहीं किया जा सकेगा। इसका मतलब यह है कि युद्ध अब केवल मिसाइलों और जहाजों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक तकनीकी लड़ाई बन गई है।
रूस की नई तकनीक और ईरान की तैयारी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन ड्रोन के कारण युद्ध के मैदान में एक ग्रे जोन उत्पन्न होगा, जहां अमेरिकी सैनिकों को यह समझ नहीं आएगा कि हमला कहां से हो रहा है। इसके अलावा, रूस ईरान को लंबी दूरी के सेटेलाइट ड्रोन देने की योजना बना रहा है, जिसमें स्टार्लिंग टर्मिनल्स का उपयोग किया जा सकता है।
यदि ऐसा हुआ, तो ईरानी ड्रोन हजारों किलोमीटर दूर अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रूस केवल हथियार नहीं दे रहा, बल्कि ईरान की पूरी ड्रोन आर्मी तैयार करने में जुटा हुआ है। इसके लिए तीन स्तर का सुरक्षा नेटवर्क बनाया जा रहा है।
सऊदी अरब का नया रुख
हाल ही में, सऊदी अरब ने अमेरिकी फोर्सेस को अपने एयरबेस और एयर स्पेस का उपयोग करने की अनुमति दी है, जो कि ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। यह जानकारी अमेरिकी मीडिया में आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब का यह अचानक बदलाव ईरान के खिलाफ एक नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है। मिडिल ईस्ट के विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई, जो अमेरिका और इसराइल के साथ है, ईरान और सऊदी के बीच तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
