ईरान-इसराइल संघर्ष: अमेरिका-इसराइल हमलों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए। इसके जवाब में, ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं, जिसमें भारत, रूस, और चीन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है। सभी पक्षों से संयम और कूटनीति की अपील की जा रही है।
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ईरान-इसराइल संघर्ष: अमेरिका-इसराइल हमलों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान-इसराइल संघर्ष: अमेरिका-इसराइल हमलों के बाद ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई, कई खाड़ी देश प्रभावित


मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई समेत कई प्रमुख अधिकारी मारे गए। इस हमले का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना और शासन परिवर्तन को बढ़ावा देना बताया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति और इसराइली प्रधानमंत्री ने इसे 'आत्मरक्षा' और 'क्षेत्रीय शांति' के लिए आवश्यक कदम बताया।


ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए मिसाइलों और ड्रोन के माध्यम से इसराइल और कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उन्होंने इसराइल और अमेरिकी हितों पर 'ऐतिहासिक जवाब' दिया है।


ईरान की जवाबी कार्रवाई के प्रमुख लक्ष्य

ईरान ने कई देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे स्थित हैं:



  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): अबू धाबी और दुबई में मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। हवाई रक्षा प्रणालियों ने कई को रोक लिया, लेकिन मलबे से अबू धाबी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई। दुबई के पाम जुमेराह क्षेत्र में आग लगी और हवाई अड्डे बंद हो गए।

  • कतर: अल उदैद एयर बेस (अमेरिकी सेना का प्रमुख अड्डा) को निशाना बनाया गया। दोहा में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं और उड़ानें निलंबित कर दी गईं।

  • बहरीन: अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर ड्रोन और मिसाइल हमले। मनामा में इमारतों और रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचा।

  • कुवैत: अली अल सलेम एयर बेस और कुवैत एयरपोर्ट पर हमले, जिसमें कुछ कुवैती सैनिक घायल हुए।

  • जॉर्डन और सऊदी अरब: अमेरिकी ठिकानों पर हमले की रिपोर्टें आईं, हालांकि विवरण सीमित हैं।


ईरान ने इन हमलों को 'अमेरिकी आक्रमण का जवाब' बताते हुए कहा कि कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक दुश्मन 'पूरी तरह हार नहीं मान लेते'।


अमेरिका की चेतावनी और सुरक्षा उपाय

अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने नागरिकों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात, दोहा (कतर) और बहरीन में अमेरिकी नागरिकों से 'घर के अंदर ही सुरक्षित रहने' की अपील की गई है। पेंटागन ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन क्षेत्र में उड़ानें बड़े पैमाने पर रद्द की गई हैं।


दुनिया भर की प्रतिक्रियाएं


  • भारत: ईरान और खाड़ी क्षेत्र में बने हालात पर गहरी चिंता जताई। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की।

  • रूस और चीन: अमेरिका-इसराइल हमलों की कड़ी निंदा की। दोनों देशों ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन' बताया और ईरान के साथ एकजुटता जताई।

  • पाकिस्तान: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते की विफलता पर चिंता जताई, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत की मांग की।

  • संयुक्त राष्ट्र: महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हमलों और जवाबी कार्रवाइयों को 'अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा' बताया। सुरक्षा परिषद में आपात बैठक हुई, जहां सभी पक्षों से तनाव कम करने की मांग की गई।

  • खाड़ी देश: सऊदी अरब, UAE, बहरीन आदि ने ईरान की जवाबी कार्रवाइयों की निंदा की और अमेरिका के साथ सहयोग का वादा किया।


यह संघर्ष अब क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के शासन पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन जवाबी हमलों से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था और तेल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। स्थिति तेजी से बदल रही है, और अगले कुछ दिनों में और घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। सभी पक्षों से संयम और कूटनीति की अपील की जा रही है ताकि बड़ा युद्ध टाला जा सके।