ईरान-इज़राइल संघर्ष: खाड़ी देशों में बढ़ते हमले और वैश्विक संकट
संघर्ष का नया चरण
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष ने एक गंभीर और व्यापक मोड़ ले लिया है। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त ऑपरेशन एपिक फ्युरी के आठवें-नौवें दिन, युद्ध की लपटें अब खाड़ी देशों तक फैल गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
दुबई पर ड्रोन हमला
हालिया घटनाक्रम में दुबई पर ईरानी ड्रोन द्वारा हमला किया गया है, जिसमें एक पाकिस्तानी नागरिक की मृत्यु की पुष्टि हुई है। दुबई मीडिया ऑफिस के अनुसार, एक ईरानी ड्रोन को हवाई रक्षा प्रणाली द्वारा रोका गया, लेकिन गिरते मलबे ने एक टैक्सी को प्रभावित किया, जिसमें बैठे पाकिस्तानी ड्राइवर की मौत हो गई। इसके अलावा, दुबई मरीना क्षेत्र में एक हाई-राइज टावर (23 मारिना टावर) पर ड्रोन के मलबे से आग लग गई, जिससे ऊपरी मंजिलों में धुआं और आग की लपटें उठीं। इस घटना ने दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) के संचालन को कुछ समय के लिए बाधित कर दिया, जहां उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं।
ईरान के हमले और प्रतिक्रिया
ईरान ने खाड़ी देशों पर हमलों को तेज कर दिया है, जिसमें यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च किए हैं, जिनमें से अधिकांश को अमेरिकी, यूएई और अन्य सहयोगी देशों की एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया। हालांकि, गिरते मलबे से नागरिक क्षेत्रों में नुकसान हुआ। दुबई के अलावा, अबू धाबी में इजरायली दूतावास सहित कई इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। ईरान ने पहले पड़ोसी देशों से माफी मांगी थी कि वह उन्हें निशाना नहीं बनाएगा, लेकिन हमले जारी रहने पर उसने पलटवार किया।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान से “पूर्ण आत्मसमर्पण” की मांग की है और कहा है कि ऑपरेशन एपिक फ्युरी तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान की मिसाइल और न्यूक्लियर क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती। इज़राइल ने तेहरान में तेल डिपो, रिफाइनरी और सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए हैं, जबकि ईरान ने लेबनान के हिजबुल्लाह के साथ मिलकर उत्तरी इज़राइल पर रॉकेट और ड्रोन हमले बढ़ा दिए हैं।
वैश्विक संकट
इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, खाड़ी में जहाजरानी प्रभावित हो रही है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ा, तो यह पूरे क्षेत्र को युद्ध की चपेट में ले सकता है, जिसमें सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश भी शामिल हो सकते हैं। स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, और संयुक्त राष्ट्र सहित कई देश युद्धविराम की अपील कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।
