ईरान-अमेरिका सीजफायर: ओमान को मिल रहा है बड़ा लाभ
सीजफायर की घोषणा से खाड़ी का माहौल बदला
ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा ने खाड़ी क्षेत्र का परिदृश्य बदल दिया है। जॉर्डन और बहरीन जैसे देश इस स्थिति से चिंतित हैं, जबकि ओमान को इस सीजफायर से अप्रत्याशित लाभ मिल रहा है। ओमान ने इस संघर्ष से खुद को दूर रखा था, और ईरान ने केवल सांकेतिक हमले किए थे। अब, बदलते हालात में, ओमान को इस सीजफायर का सबसे अधिक लाभ होगा।
ओमान के विदेश मंत्री का स्वागत
ओमान के विदेश मंत्री, अल बुसैदी ने सीजफायर का स्वागत किया है। उन्होंने इसे क्षेत्रीय शांति के लिए आवश्यक बताया है।
सीजफायर से ओमान को लाभ क्यों?
ओमान की सीमा होर्मुज के एक हिस्से से जुड़ी हुई है, जबकि दूसरी ओर ईरान है। सीजफायर के तहत, ईरान ने ओमान के साथ मिलकर होर्मुज में एक टोल बूथ स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। सीएनएन के अनुसार, ईरान का लक्ष्य हर मालवाहक जहाज से 2 मिलियन डॉलर वसूलना है।
ईरान इस माध्यम से हर साल लगभग 500 बिलियन डॉलर की वसूली करना चाहता है और इसके लिए प्रोटोकॉल की मांग की है। ईरान का कहना है कि होर्मुज उसके नियंत्रण में है और व्यापारियों को इसके लिए भुगतान करना होगा। अमेरिका ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध नहीं किया है।
यदि ईरान का यह प्रस्ताव लागू होता है, तो ओमान को भी टोल से लाभ होगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ओमान को कितना पैसा मिलेगा, लेकिन अनुमान है कि उसे आधा हिस्सा मिल सकता है। यदि ऐसा होता है, तो ओमान को हर साल 250 बिलियन डॉलर का लाभ हो सकता है।
ईरान ओमान को पैसा क्यों दे रहा है?
ओमान का एक हिस्सा होर्मुज में है। यदि ओमान अमेरिका को यहां एक बेस देता है, तो ईरान की स्थिति कमजोर हो सकती है। ओमान ने युद्ध के दौरान अमेरिका को कोई स्थान नहीं दिया, जिसके कारण अमेरिका को कुवैत और यूएई के रास्ते ईरान पर हमला करना पड़ा।
यदि ओमान अपने होर्मुज के हिस्से पर अमेरिका को बेस देता है, तो इससे तनाव बढ़ सकता है और ईरान को नुकसान हो सकता है। इसलिए, ईरान इस स्थिति में कोई जोखिम नहीं लेना चाहता है।
