ईरान-अमेरिका संघर्ष: होर्मुज जलमार्ग पर भारतीय जहाजों की स्थिति
ईरान की नाकाबंदी का प्रभाव
ईरान ने अमेरिका के दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी कर दी। इस स्थिति ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक पर नौसेना की ताकत की सीमाओं को उजागर किया है। अमेरिकी नौसेना को ओमान की खाड़ी में तैनात किया गया है ताकि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखी जा सके, लेकिन यह नाकाबंदी पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो पाई है।
नाकाबंदी के बावजूद जहाजों का गुजरना
रिपोर्टों के अनुसार, कई टैंकर इस नाकाबंदी को चकमा देकर निकलने में सफल रहे हैं। विशेषज्ञों ने एक ऐसे मार्ग की ओर इशारा किया है, जिससे जहाज सीधे ईरान के खार्ग द्वीप से मुंबई तक पहुंच सकते हैं। हाल ही में भारत का ‘देश गरिमा’ जहाज इस मार्ग से गुजरने में सफल रहा, जबकि अन्य भारतीय जहाजों को ईरानी हमले का सामना करना पड़ा।
30 से अधिक जहाजों का गुजरना
‘देश गरिमा’ ने कतर के रास लाफान से 97,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लाया। नाकाबंदी के बाद से 30 से अधिक अन्य टैंकर भी होर्मुज से गुजर चुके हैं। हालांकि, ईरान या भारत ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
भारत के जहाजों की स्थिति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत के 14 जहाज मौजूद हैं। लेकिन सवाल यह है कि ये जहाज किस मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने एक संभावित मार्ग का उल्लेख किया है, जो पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है।
पाकिस्तान के जलमार्ग से गुजरने की संभावना
हालांकि यह तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन यह भारत के लिए एक जटिल मामला बन जाता है। सामान्य परिस्थितियों में, अमेरिकी नौसेना किसी अन्य देश के समुद्री क्षेत्र में जहाजों को रोक नहीं सकती।
क्या भारतीय जहाज पाकिस्तानी जलक्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं?
संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून के अनुसार, हर तटीय राष्ट्र का अपने 12 नॉटिकल मील तक के जलक्षेत्र पर नियंत्रण होता है। भारतीय जहाजों को पाकिस्तानी जलक्षेत्र में प्रवेश की अनुमति है, लेकिन इसके लिए संबंधित देश से मंजूरी लेनी पड़ती है।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय जहाजों को अमेरिकी नाकाबंदी से सीधे खतरा नहीं है, लेकिन ईरानी पक्ष से खतरा बना हुआ है। स्थिति जटिल है, क्योंकि भारत का अधिकांश व्यापार विदेशी झंडे वाले जहाजों से होता है।
