ईरान-अमेरिका संघर्ष का भारत पर प्रभाव: गैस संकट की जटिलताएँ

ईरान-अमेरिका संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर गैस और तेल संकट को जन्म दिया है, जिसका प्रभाव भारत पर भी पड़ा है। सरकार के दावों के बावजूद, घरेलू गैस की कमी और महंगाई ने आम जनता को प्रभावित किया है। इस लेख में हम भारत की स्थिति, सरकारी दावों और जमीनी हकीकत पर चर्चा करेंगे। क्या भारत इस संकट से उबर पाएगा? जानिए पूरी कहानी।
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ईरान-अमेरिका संघर्ष का भारत पर प्रभाव: गैस संकट की जटिलताएँ

वैश्विक संकट की पृष्ठभूमि

वर्तमान समय में, विश्व में एक गंभीर उथल-पुथल का दौर चल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति इस कदर बढ़ गई है कि डोनाल्ड ट्रंप एक सभ्यता के अंत की बात कर रहे हैं और ईरान को नष्ट करने की धमकी दे रहे हैं। वहीं, रूस और चीन जैसे देशों की रणनीतियों ने भी कई वैश्विक शक्तियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ईरान ने अमेरिका के खिलाफ जो प्रतिरोध दिखाया है, उसने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। ईरान-अमेरिका संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव तेल और गैस के संकट के रूप में सामने आया है, जिससे कई देशों में हाहाकार मचा हुआ है। कई स्थानों पर लॉकडाउन जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है और कई देशों ने अपने खर्चों में कटौती की है। गैस और तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।


भारत की स्थिति

इस संकट के बीच, भारत में चुनावी प्रचार और आईपीएल क्रिकेट मैचों की धूमधाम चल रही है। क्या यह मान लेना सही होगा कि ईरान-अमेरिका युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है? बिल्कुल नहीं। सरकार बार-बार यह दावा करती रही है कि देश में गैस और कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। हमने देखा है कि लोग गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़े रहे हैं और कई पेट्रोल पंप बंद होने की खबरें भी आई हैं।


सरकारी दावे और वास्तविकता

सरकार का कहना है कि यह सब पैनिक बाइंग के कारण हुआ है और देश में कोई कमी नहीं है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें सामान्य हैं, लेकिन गैस की स्थिति अलग है। अगर सरकार का दावा सही है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है, तो फिर कमर्शियल सिलेंडर पर रोक क्यों लगाई गई? घरेलू सिलेंडर के रिफिल के लिए समय सीमा बढ़ाई गई है। पहले केवल शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को कमर्शियल सिलेंडर मिलते थे, लेकिन अब इसे 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है।


जमीनी हकीकत

मेरे अनुभव के अनुसार, जब घरेलू गैस सिलेंडर की कमी थी, तब भी मुझे दिल्ली में गैस दो दिनों के भीतर मिल गई थी। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता में कुछ देरी हो रही है। घरेलू गैस की कीमतों में हाल ही में 60 रुपये की वृद्धि हुई है। लेकिन जिनके पास घरेलू गैस का कनेक्शन नहीं है, उन्हें बाजार में 14 लीटर का सिलेंडर 2500 से 3000 रुपये में मिल रहा है। छोटे कामगारों के लिए गैस की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिससे उनके लिए जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है।


महंगाई का असर

बाजार में पानी पुरी और चाय की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। छोटे कामगारों को गैस की कमी के कारण अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। रेस्टोरेंटों में भी गैस की कीमतों में वृद्धि के कारण खाने की कीमतें बढ़ गई हैं। युद्ध के बाद से कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें 300 से 380 रुपये तक बढ़ गई हैं।


गैस संकट के समाधान

दिल्ली में कई लोग मिट्टी के चूल्हे पर खाना बना रहे हैं। गैस की कमी के कारण लोग अपनी पुरानी परंपराओं की ओर लौट रहे हैं। हालांकि, सरकार ने केरोसिन की उपलब्धता सुनिश्चित की है। मिडिल क्लास के घरों में इंडक्शन स्टोव की बिक्री बढ़ी है।


भारत की स्थिति में सुधार

हालांकि, भारत को गैस और तेल संकट का सामना करने में उतनी कठिनाइयाँ नहीं आई हैं। इसका एक कारण रूस और ईरान के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी की कतर यात्रा से भी उम्मीद है कि एलजी संकट का समाधान निकलेगा।