इलाहाबाद हाईकोर्ट में नीले ड्रम हत्याकांड की सुनवाई, मुस्कान और साहिल ने फांसी की सजा को चुनौती दी
नीले ड्रम हत्याकांड का मामला
मेरठ में हुए नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की कानूनी परेशानियों का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में पहुंच गया है। दोनों ने मेरठ की निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा और दोषी ठहराए जाने के फैसले को चुनौती दी है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनकी अपील पर सुनवाई हुई। अदालत ने अपील को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 30 नवंबर निर्धारित की है।
हत्या का विवरण
यह मामला मर्चेंट नेवी में कार्यरत सौरभ राजपूत की हत्या से संबंधित है, जो मार्च 2025 में सामने आया था। इस घटना ने पूरे देश में काफी ध्यान आकर्षित किया और इसे 'नीले ड्रम हत्याकांड' के नाम से जाना गया। जांच के बाद, सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत ने दोषी ठहराया।
फांसी की सजा का निर्णय
14 अक्टूबर को सुनाई गई थी फांसी की सजा
मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया। इसके बाद 14 अक्टूबर को उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। निचली अदालत के इस निर्णय के खिलाफ दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें दोषसिद्धि और सजा दोनों को चुनौती दी गई है।
हाईकोर्ट में सुनवाई
इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच में हुई, जिसमें जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा शामिल थे। अदालत ने अपील को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की। हालांकि, अपील का स्वीकार होना यह नहीं दर्शाता कि निचली अदालत की सजा रद्द हो गई है।
नीले ड्रम हत्याकांड का सारांश
यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। मार्च 2025 में हुई इस घटना में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को आरोपी बनाया गया था। निचली अदालत ने दोनों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। इस मामले में शव को नीले ड्रम में छिपाने की बात सामने आई थी, जिसने इसे और भी चर्चित बना दिया।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अब मुस्कान और साहिल की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में आगे सुनवाई होगी। 30 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले की कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी। फिलहाल, हाईकोर्ट की ओर से निचली अदालत के फैसले पर कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।
