इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणियां की हैं, जिसमें पूर्व पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने एक निर्दोष महिला के 80 दिनों तक जेल में रहने की घटना को लेकर पुलिस के रवैये की आलोचना की है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत की टिप्पणियों के पीछे की कहानी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल gyanhigyan

प्रयागराज में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गाजियाबाद पुलिस की कार्यशैली और पूर्व पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां की हैं। अदालत ने एक भूमि विवाद को जबरन 'गैंगस्टर एक्ट' में बदलने की कोशिश का खुलासा किया है।


गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई रद्द

हाईकोर्ट ने इस मामले में गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए आरोपी राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार के खिलाफ चल रही गैंगस्टर एक्ट की सभी कार्यवाहियों को तुरंत रद्द कर दिया है।


पुलिस की लापरवाही का खामियाजा एक निर्दोष महिला ने भोगा

सुनवाई के दौरान अदालत ने गाजियाबाद पुलिस के व्यवहार की आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की कमजोर कार्यप्रणाली और अधूरे ज्ञान का सीधा लाभ आरोपियों को मिला।


कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी: पुलिस के इस 'अधूरे ज्ञान' और तानाशाही के कारण एक निर्दोष 35 वर्षीय महिला को 80 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। अदालत ने सवाल उठाया कि 'स्मार्ट पुलिसिंग' के नाम पर यह क्या अन्याय है?


पूर्व पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा पर सवाल

हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के पूर्व पुलिस कमिश्नर अजय मिश्रा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि कमिश्नर ने बिना किसी सबूत की जांच किए गैंग चार्ट को मंजूरी दी, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है।


सुनवाई के दौरान पूर्व कमिश्नर पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि:



  • उनका व्यवहार पूरी तरह से मनमाना और प्रतिशोधी था।

  • उन्होंने बिना सोचे-समझे इस मामले में कार्रवाई की।


हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा, “हम बिना ठोस सबूत किसी अधिकारी के व्यवहार पर टिप्पणी नहीं करेंगे। यह उत्तर प्रदेश सरकार का काम है कि वह ऐसे अधिकारियों की 'योग्यता और कार्यक्षमता' का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करे।”