इलाहाबाद हाई कोर्ट की मानवाधिकार आयोग पर कड़ी टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच के संदर्भ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने आयोग की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग होती है, तब आयोग मौन रहता है। हाई कोर्ट ने ईओडब्ल्यू से मदरसों की जांच पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 11 मई को तय की है। इस मामले में जजों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं, जिससे मामला लार्जर बेंच को भेजा जा सकता है।
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मदरसा जांच पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच के संदर्भ में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि आयोग के मदरसों की जांच के आदेश से वे 'स्तब्ध' हैं। इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग के मामलों का भी जिक्र किया।


मॉब लिंचिंग पर आयोग की चुप्पी

हाई कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि जब मुस्लिमों की मॉब लिंचिंग होती है, तब मानवाधिकार आयोग चुप रहता है, लेकिन मदरसों की जांच के मामले में सख्त रुख अपनाता है। कोर्ट ने कहा कि आयोग अब अपनी जिम्मेदारियों के बजाय मदरसों की जांच का आदेश दे रहा है। यह टिप्पणी जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने सुनवाई के दौरान की।


11 मई को अगली सुनवाई

मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर राज्य सरकार ने ईओडब्ल्यू को 588 अनुदानित मदरसों की जांच का कार्य सौंपा था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मामले में ईओडब्ल्यू से जांच के आदेश पर रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।


मानवाधिकार आयोग को नोटिस

हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी करते हुए उनके वकील को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मदरसों की ईओडब्ल्यू द्वारा जांच पर पहले दिए गए अंतरिम आदेश को अगले आदेश तक बनाए रखा है।


जजों के बीच मतभेद

सुनवाई करने वाली डिवीजन बेंच के दोनों जजों ने अलग-अलग आदेश पारित किए हैं। जस्टिस अतुल श्रीधरन ने NHRC पर टिप्पणी करते हुए अलग आदेश दिया, जबकि जस्टिस विवेक सरन ने कहा कि वे जस्टिस श्रीधरन की कुछ टिप्पणियों से सहमत नहीं हैं। यह मामला आगे लार्जर बेंच को भेजा जा सकता है।