इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दी अग्रिम जमानत
अग्रिम जमानत का फैसला
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यौन शोषण के आरोप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को बुधवार को अग्रिम जमानत प्रदान की। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने इस मामले में जमानत याचिका पर निर्णय सुनाया। अदालत ने दोनों पक्षों को मीडिया में कोई बयान न देने का निर्देश भी दिया।
इससे पहले, अदालत ने 27 फरवरी को अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कहा था कि नाबालिगों के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
जमानत की शर्तें
अग्रिम जमानत देते समय अदालत ने याचिकाकर्ताओं पर कई शर्तें लगाईं, जैसे कि वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और सुनवाई की तारीख पर अदालत में उपस्थित रहेंगे।
अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता किसी भी व्यक्ति को तथ्य छिपाने के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लालच या धमकी नहीं देंगे और बिना अनुमति विदेश नहीं जाएंगे।
मीडिया में बयान देने पर रोक
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता, पीड़ित और शिकायतकर्ता मामले के संबंध में किसी भी मीडिया संस्थान को बयान नहीं देंगे। यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है, तो अभियोजक जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अदालत ने यह भी बताया कि पीड़ितों ने शिकायतकर्ता को घटना की जानकारी 18 जनवरी, 2026 को दी, जबकि शिकायतकर्ता ने पुलिस को 24 जनवरी को सूचित किया।
प्राथमिकी और आरोप
प्रयागराज के अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) के आदेश पर 21 फरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ झूंसी थाने में मामला दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया कि माघ मेले के दौरान दो नाबालिग बच्चे उनके पास आए और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।
