इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी की नागरिकता मामले में केंद्र को शामिल होने की दी अनुमति

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी की नागरिकता से संबंधित मामले में केंद्र सरकार को पक्षकार बनने की अनुमति दी है। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह आगामी छह अप्रैल तक संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करे। इस मामले में याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। जानें इस महत्वपूर्ण मामले की पूरी जानकारी और अदालत के आदेश के पीछे की कहानी।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राहुल गांधी की नागरिकता मामले में केंद्र को शामिल होने की दी अनुमति

राहुल गांधी की नागरिकता विवाद पर अदालत का आदेश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ शाखा ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता से संबंधित मामले में पक्षकार बनने की अनुमति प्रदान की। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह आगामी छह अप्रैल तक संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करे।


यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया। अदालत ने केंद्र को इस मामले में विरोधी पक्षकार के रूप में शामिल होने की अनुमति दी और नागरिकता विवाद से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।


पिछली सुनवाई में, केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय से प्राप्त दस्तावेजों की गोपनीयता का हवाला देते हुए अनुरोध किया था कि इस मामले की सुनवाई सार्वजनिक अदालत में न की जाए। इसके बाद अदालत ने चैंबर में कार्यवाही की थी। याचिकाकर्ता ने लखनऊ की विशेष एमपी/एमएलए अदालत के 28 जनवरी 2026 के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।


शिशिर ने अपनी याचिका में भारतीय दंड संहिता, पासपोर्ट अधिनियम और शासकीय गोपनीयता अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी की नागरिकता से संबंधित आरोपों में मुकदमा दर्ज करने और विस्तृत जांच के निर्देश देने की मांग की है।