इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर 12% ब्याज की जांच शुरू की

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में देरी को लेकर गंभीरता दिखाई है। अदालत ने 15% ब्याज के बजाय 12% ब्याज के साथ जारी किए जा रहे रिकवरी प्रमाण पत्रों की जांच का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने इस मामले में गन्ना आयुक्त से जानकारी मांगी है। अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
 | 
gyanhigyan

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान पर अदालत का निर्णय

लखनऊ, 5 अगस्त: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में देरी को लेकर गंभीरता दिखाई है। अदालत ने 15 प्रतिशत ब्याज के बजाय 12 प्रतिशत ब्याज के साथ जारी किए जा रहे रिकवरी प्रमाण पत्रों की जांच का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।


अदालत ने उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त से यह जानकारी मांगी है कि दो दिसंबर, 2021 के बाद किन-किन पूर्व गन्ना आयुक्तों ने रिकवरी प्रमाण पत्र जारी किए हैं। पीठ ने यह भी कहा कि 15 प्रतिशत ब्याज के बजाय 12 प्रतिशत ब्याज वाले प्रमाण पत्र जारी करना उच्च न्यायालय के 23 दिसंबर, 2021 के आदेश का उल्लंघन प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह यह देखेगी कि क्या यह कार्य किसी मिलीभगत के तहत किया गया या इसका उद्देश्य गन्ना किसानों की कीमत पर चीनी मिलों को लाभ पहुंचाना था।


इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।