इरा खान ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपनी चुप्पी तोड़ी, मानसिक स्वास्थ्य पर की बात

इरा खान ने हाल ही में सोशल मीडिया पर स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने बताया कि क्यों उन्होंने पहले कुछ नहीं कहा और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर भी चर्चा की। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोग उनकी ईमानदारी की सराहना कर रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि सार्वजनिक हस्तियों को ऐसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए। जानें इस पर और क्या कहा गया है।
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इरा खान की प्रतिक्रिया


बॉलीवुड की मशहूर अभिनेता आमिर खान की बेटी इरा खान ने हाल ही में सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। देशभर में चल रहे छात्र प्रदर्शनों पर कई बॉलीवुड हस्तियों ने अपनी राय दी, लेकिन इरा की चुप्पी पर सवाल उठाए गए। अब उन्होंने एक विस्तृत पोस्ट साझा कर बताया है कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले क्यों कुछ नहीं कहा।


इरा ने स्पष्ट किया कि उनकी चुप्पी का मतलब यह नहीं है कि उन्हें छात्रों की समस्याओं या आंदोलनों से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि वह जानबूझकर नकारात्मक खबरें और हिंसा से जुड़े वीडियो नहीं देखतीं, क्योंकि इससे उनकी मानसिक सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हर मुद्दे पर अपनी राय देना जरूरी नहीं है, खासकर जब उन्हें लगता है कि उनकी बात में कोई नया दृष्टिकोण नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह माना कि चुप रहना कभी-कभी गलत संदेश दे सकता है।


इरा खान ने स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर अपनी चुप्पी तोड़ी, मानसिक स्वास्थ्य पर की बात


इरा ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लगातार नकारात्मक समाचार और हिंसा की छवियों को देखना उनके लिए आसान नहीं होता। इसलिए, वह अपने मानसिक संतुलन को बनाए रखने के लिए कई बार ऐसी खबरों से दूरी बना लेती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक विशेषाधिकार है, जो हर किसी के पास नहीं होता।


इरा खान के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की, जबकि अन्य का मानना है कि सार्वजनिक हस्तियों को सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखनी चाहिए।


फिलहाल, इरा का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, और उनके बयान को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग उनकी सोच का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि प्रभावशाली व्यक्तियों की आवाज ऐसे आंदोलनों में महत्वपूर्ण हो सकती है।