इजरायल-लेबनान संघर्ष विराम: शांति प्रयासों में नई उम्मीद

पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को एक नई दिशा मिली है, जब इजरायली मीडिया ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में 10 दिनों के लिए संघर्ष विराम लागू किया गया है। हालांकि, हिजबुल्ला की ओर से कोई आधिकारिक आश्वासन नहीं आया है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसफ औन ने इजरायली पीएम से बातचीत करने से इनकार कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता की तैयारियां भी चल रही हैं। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। जानें इस स्थिति का विस्तृत विश्लेषण।
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इजरायल-लेबनान संघर्ष विराम: शांति प्रयासों में नई उम्मीद gyanhigyan

संघर्ष विराम की घोषणा

इजरायल-लेबनान संघर्ष विराम: शांति प्रयासों में नई उम्मीद

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को एक नई दिशा मिली है, क्योंकि इजरायली मीडिया ने बताया है कि गुरुवार से दक्षिणी लेबनान में एक संघर्ष विराम लागू किया गया है। यह युद्ध विराम 10 दिनों के लिए है, लेकिन हिजबुल्ला की ओर से कोई आधिकारिक आश्वासन नहीं आया है।

इससे पहले, लेबनान के राष्ट्रपति जोसफ औन ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीधी बातचीत करने से इनकार कर दिया था। दोनों देशों के बीच 34 वर्षों बाद सीधी वार्ता की संभावना पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक पोस्ट साझा की थी।

बाद में औन ने ट्रंप से भी बातचीत की। पाकिस्तान और ईरान ने भी कहा है कि अमेरिका से शांति वार्ता से पहले लेबनान में स्थिरता आवश्यक है। इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित दूसरे दौर की वार्ता की तैयारियां भी चल रही हैं।

हालांकि, परमाणु संवर्धन पर अभी भी कुछ मुद्दे अटके हुए हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरानी नेताओं से मुलाकात की। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ वार्ता की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

इजरायल-लेबनान के बीच युद्धविराम
एपी के अनुसार, इजरायल और लेबनान के बीच 34 साल बाद उच्चस्तरीय शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गई। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन राष्ट्रपति औन ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर स्पष्ट किया कि जब तक हिजबुल्ला से संघर्ष विराम नहीं होता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी।

लेबनान के एक अधिकारी ने बताया कि रूबियो ने औन से कहा कि वह स्थिति को समझते हैं। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से लेबनान में युद्धविराम को एक पूर्व शर्त के रूप में समर्थन नहीं दिया है, और इजरायली सरकार ने संभावित बैठक को हिजबुल्ला को निरस्त्र करने पर केंद्रित शांति वार्ता के रूप में प्रस्तुत किया है। इस हफ्ते वॉशिंगटन में दोनों पक्षों के बीच राजदूत स्तर की बातचीत हुई थी, लेकिन हिजबुल्ला ने इसका विरोध किया।

इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान समर्थित हिजबुल्ला के खिलाफ चल रहे युद्ध को समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। इस संघर्ष में अब तक 2,196 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 12 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इजरायली सेना ने लेबनान की लिटानी नदी पर स्थित अंतिम पुल को भी ध्वस्त कर दिया, जो दक्षिणी लेबनान को देश से जोड़ता था। उन्होंने दावा किया कि हिजबुल्ला के 70 ठिकानों को एक मिनट में नष्ट कर दिया गया। हिजबुल्ला ने 24 घंटे में 39 सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया है।

चीन की अपील
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से होर्मुज जलमार्ग में आवागमन को फिर से शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का खुला रहना सभी देशों के लिए फायदेमंद है। हालांकि, वांग यी ने यह भी कहा कि एक ओर ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान किया जाना चाहिए, वहीं दूसरी ओर इस मार्ग से जहाजों के सुरक्षित और स्वतंत्र आवागमन की गारंटी भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चीन संघर्ष विराम बनाए रखने और बातचीत फिर से शुरू करने का समर्थन करता है।