इजराइल के राजदूत का बयान: मोदी की यात्रा से नहीं जुड़ा ईरान पर हमला
इजराइल के राजदूत रुवेन अजर ने हाल में ईरान पर हुए हमलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान तय नहीं की गई थी। राजदूत ने बताया कि मोदी की यात्रा के बाद इजराइल को एक सैन्य अवसर दिखाई दिया, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। इस लेख में मोदी की यात्रा, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की गई है।
| Mar 4, 2026, 13:35 IST
इजराइल के राजदूत का स्पष्टीकरण
भारत में इजराइल के राजदूत रुवेन अजर ने हाल ही में ईरान पर हुए हमलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सैन्य कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान पूर्व निर्धारित नहीं थी। उनके अनुसार, उस समय ऐसी किसी कार्रवाई की योजना नहीं बनाई गई थी, और यह कदम बाद में परिस्थितियों के अनुसार उठाया गया।
मोदी की यात्रा के दौरान चर्चा
एक साक्षात्कार में राजदूत ने बताया कि मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिति और आपसी संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई थी। हालांकि, ईरान के खिलाफ जो सैन्य कार्रवाई बाद में हुई, उसके बारे में उस समय कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां अक्सर तत्काल अवसरों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर होती हैं।
सैन्य कार्रवाई का समय
राजदूत ने बताया कि जब मोदी अपनी यात्रा समाप्त कर भारत लौट चुके थे, तभी इजराइल को एक सैन्य अवसर दिखाई दिया, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों की योजना कई बार बहुत कम समय में बनाई जाती है और यह पूरी तरह से परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए यह मानना गलत होगा कि मोदी की यात्रा के दौरान ही ईरान पर हमले का निर्णय लिया गया था।
मोदी की इजराइल यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इजराइल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा की थी, जिसमें उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ कई मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने सुरक्षा, तकनीक, कृषि, नवाचार और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। इस यात्रा के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करना था।
पश्चिम एशिया में तनाव
मोदी की यात्रा के तुरंत बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया। इजराइल और अमेरिका से जुड़ी सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान पर हमला किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया और कई देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता जताई।
इजराइल की सुरक्षा रणनीति
रुवेन अजर ने कहा कि ईरान के साथ लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण इजराइल अपनी सैन्य और तकनीकी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। ईरान की गतिविधियों को समझने के लिए इजराइल ने अपनी खुफिया प्रणाली को उन्नत किया है और आधुनिक हथियार प्रणालियों में भारी निवेश किया है।
युद्ध की बदलती प्रकृति
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। अब सुरक्षा केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और उन्नत रक्षा प्रणालियों के माध्यम से भी सुनिश्चित की जा रही है। मिसाइल रक्षा प्रणाली और लेजर आधारित सुरक्षा तकनीक जैसे उपायों के जरिये हमलों को रोकने की क्षमता विकसित की जा रही है।
भारत के साथ सुरक्षा संवाद
राजदूत ने बताया कि इजराइल ने अपने मित्र देशों के साथ सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को साझा किया है, और भारत के साथ भी इस विषय पर संवाद जारी है। उनके अनुसार, इजराइल मानता है कि ईरान की सैन्य और परमाणु गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं, इसलिए इस विषय पर सतर्क रहना आवश्यक है।
जटिल पश्चिम एशिया की राजनीति
ईरान पर हमले और मोदी की यात्रा के बाद उत्पन्न परिस्थितियों ने पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि, इजराइल के राजदूत ने स्पष्ट किया है कि यह सैन्य कार्रवाई मोदी की यात्रा से जुड़ी कोई पूर्व निर्धारित योजना नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार लिया गया निर्णय था।
